जिले के खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है।
डिप्टी डायरेक्टर खान सुरक्षा निदेशालय के जांच और निर्देश के बावजूद
ब्लास्टिंग के लिए होल गैर प्रशिक्षित श्रमिकों से भरवाए जा रहे हैं। इससे
आए दिन हादसे हो रहे हैं और संबंधित विभाग महज जांच की कोरम अदायगी कर रहे
हैं।
वहीं जिला जिम्मेदार एक दूसरे पर कार्रवाई का निर्देश देने की बात
कहते हुए अपने जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आए। बिल्ली मारकुंडी खनन
क्षेत्र एक बार फिर शनिवार को रक्तरंजित हुआ। ब्लास्ट के दौरान पांच
श्रमिक पट्टाधारक धर्मेंद्र कुमार सिंह की खदान में घायल हो गए।
यह संयोग
था कि श्रमिक काफी दूर थे जिससे पत्थर के चंद टुकड़े ही उनके शरीर पर पड़े
वरना मौत भी हो सकती थी। ब्लास्टिंग के दौरान होल भरने से लेकर चार्ज करने
तक का कार्य प्रशिक्षित ब्लास्टर एवं फोरमैन जो खान सुरक्षा महानिदेशालय से
सहमति प्राप्त होते हैं, लेकिन अप्रशिक्षित मजदूरों से थोड़े से धन के
लालच में यह कार्य करवाया जा रहा था जिसके कारण यह हादसा हुआ है।
खान
सुरक्षा निदेशालय की ओर से सुरक्षा के कई मानक निर्धारित किए गए हैं लेकिन
उनमें से किसी भी मानक का पालन नहीं हो रहा है। शनिवार को जो कर्मचारी घायल
हुए उनमें से किसी ने सुरक्षा के नजरिए से हेलमेट तक नहीं पहना था। उधर
जिला खनन अधिकारी पीके सिंह का कहते हैं कि यह हादसा सिर्फ ब्लास्टर की कमी
के चलते हुआ है।
उसने यदि ब्लास्ट करने से पहले श्रमिकों की सुधि ली होती
तो हादसा नहीं होता। उधर, जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी कहते हैं कि खनन
क्षेत्र में विस्फोट करने में विस्फोटक अधिनियम का पूरा ख्याल रखा जाए।
उन्होंने एसपी से कहा है कि इसका ख्याल न रखने वाले पट्टाधारकों के खिलाफ
संबंधित कानून के तहतकार्रवाई करें।