रामपुर गांव में बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री वितरित करती राजस्व टीम।
सोनभद्र। घाघर नदी में तेज उफान के कारण शुक्रवार की रात नगवां ब्लाक के रामपुर गांव में आई तबाही के लिए लोगों ने पुल की तकनीकी खामी को जिम्मेदार ठहराया।
ग्रामीणों का दावा है कि पुल का निर्माण कुछ इस तरह किया गया है कि नदी में बाढ़ आने पर पानी गांव में घुसने लगता है। सात साल में दूसरी बार आई आपदा से ग्रामीण भयभीत हैं। गांव में ऐसे समय पानी घुसा जब, ज्यादातर लोग जगे हुए थे। इससे कई के घर और गृहस्थी तबाह हो गई लेकिन लोगों की जान बच गई।
प्रधान शिवमूरत ने बताया कि वर्ष 2018 में भी इसी तरह बाढ़ की स्थिति बनी थी। तब 32 लोगों का घर इसकी चपेट में आया। इस बार उन्होंने 150 से अधिक घर इसकी चपेट में आने का दावा किया। उनका कहना था कि लगभग 50 घर पूरी तरह घराशायी हो गए हैं। वहीं 100 से अधिक घरों को भी नुकसान पहुंचा है। प्रधान का कहना था कि वर्ष 1985-87 में ऐसी बाढ़ दिखी थी।
उसके बाद 2018 में बाढ़ ने गांव को चपेट में लिया था। इस बार लगातार चार घंटे की मूसलाधार बारिश ने पूरे गांव में तबाही मचा कर रख दी। ग्रामीण रामरक्षा, कलावती, राधिका आदि का कहना था कि सबसे ज्यादा बाढ़ की दिक्कत घाघर नदी पर छलका नुमा पुल के बाद आई है। पुल का निर्माण कुछ इस तरह से हो गया है कि बाढ़ का पानी तेजी से आगे निकल नहीं पाता। इसलिए जब कभी मजे की बारिश की स्थिति बनती है तो गांव के इर्द-गिर्द बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगती है। इस बार चार घंटे तक लगातार मजे की बारिश हुई और गलत तरीके से पुल निर्माण के कारण घाघर नदी में आया पानी तेजी से आगे नहीं निकल पाया।