सोनभद्र। नए सत्र में जब परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय खुलेंगे तो वहां नई किताब मिलेगी। उसमें चित्रों के जरिए नौनिहालों को समानता का अधिकार और बुजुर्गों का सम्मान करने का तरीका बताया जाएगा। इसके लिए नीति आयोग के निर्देशानुसार शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। जल्द ही किताबों की भी छपाई शुरू हो जाएगी।
अभी तक किताबों में जो चित्र होते थे, उसमें लैंगिक समानता से संबंधित विषय कम ही होते थे, लेकिन अब ऐसे चित्रों की संख्या अधिक होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि बच्चे कहानी पढ़ने या सुनने की तुलना में चित्रों के जरिए ज्यादा समझते हैं। कक्षा एक से ही अगर बच्चों को समानता के बारे में बताया जाएगा तो उनमें समझ विकसित होगी और लैंगिक भेदभाव नहीं के बराबर होगा। अपने से बड़ों का सम्मान करना, सभी के साथ मिलकर रहना और बालक-बालिका में बराबरी का भाव रहेगा। इसलिए ऐसे चित्रों को शिक्षक विस्तार से समझाएंगे।
इस तरह से समझाने की होगी कोशिश
सोनभद्र। नए सत्र में जो किताब आनी है, उसमें समानता को प्रदर्शित करने वाले कई चित्र होंगे। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो एक चित्र होगा जिसमें चार बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ते होगी। वहीं पास में एक बालक या बालिका व्हील चेयर पर बैठकर पढ़ती होगी। परिवार के बुजुर्ग व्यक्ति पास में बैठकर उन्हें कुछ बता रहे होंगे। इसका मतलब यह कि दिव्यांग को अलग नहीं समझना है। दिव्यांग बालक या बालिका के मन में किसी तरह का अलग भाव न रहे। इसलिए इस तरह के चित्र होंगे। साथ ही एक महिला बागवानी कर रही होगी और व्यक्ति खाना परोस रहा होगा। यानी अब यह समानता प्रदर्शित होगी कि दोनों समान हैं। महिला-पुरुष में किसी तरह का भेद नहीं है।
कक्षा एक में प्रवेश लेते हैं करीब 40 हजार बच्चे
सोनभद्र। जिले में कुल दो लाख 50 हजार बच्चे परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ते हैं। इनके लिए 2,458 स्कूल भी हैं। इन स्कूलों में करीब सात हजार शिक्षक तैनात हैं। कक्षा एक में हर वर्ष करीब 40 हजार बच्चे प्रवेश लेते हैं। उनकी किताबों में समानता का भाव जगाने वाले चित्र प्राथमिकता में होंगे।
बच्चों में समानता की भावना जागृत करने और उनकी समझ को विकसित करने के लिए नए सत्र से किताबों में कुछ बदलाव भी किया जाना है। इसके लिए निर्देश प्राप्त हुआ है। ऑनलाइन प्रशिक्षण में चित्रों के जरिए पढ़ाने का तरीका भी समझाया जा रहा है। बच्चे चित्रों के जरिए ज्यादा समझते हैं, इसलिए इसी पर जोर है।
- डॉ. गोरखनाथ पटेल, बीएसए-सोनभद्र