सोनभद्र। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी जिले में 330 सामुदायिक शौचालयों व 162 पंचायत भवनों का काम अधूरा पड़ा है। यह स्थिति तब है जबकि दिसंबर तक ये काम हर हाल में पूरा कराने की हिदायत दी गई थी। जबकि कार्यदायी संस्थाएं अब तक आधा काम भी पूरा नहीं करा पाई हैं।
जिले के 637 ग्राम पंचायतों में से प्रत्येक में 6.77 लाख रुपये की लागत से एक -एक सामुदायिक भवन के निर्माण की योजना मंजूर की गई थी। इसमें भी बड़ी पंचायतों में दो-दो सामुदायिक भवनों के निर्माण की योजना बनाई गई। इस तरह से जिले में कुल 679 सामुदायिक भवनों के निर्माण की योजना मंजूर की गई है। पिछले दिनों में सामुदायिक भवनों के निर्माण में धन की कमी को पूरा करने के लिए पांच करोड़ रुपये परफारमेंस ग्रांट की धनराशि भी शासन स्तर से जारी की गई। इसमें से 2.10 लाख रुपये 218 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भवनों के निर्माण केलिए और जारी किए गए। साथ ही हिदायत दी गई थी कि दिसंबर तक काम पूरा करा लिया जाए। इस बीच दिसंबर माह बीत गया और अब तक सिर्फ 340 सामुदायिक भवनों के निर्माण के कार्य ही पूरे हो पाए हैं। अब भी 339 सामुदायिक भवनों के निर्माण का काम पूरा नहीं हो पाया है। इसी तरह से जिले में 21.45 लाख रुपये की लागत से 157 और 17.46 लाख रुपये की लागत से 26 पंचायत भवनों के निर्माण की योजना मंजूर की गई है। पंचायत भवनोंके निर्माण का कामि भी दिसंबर तक पूरा किया जाना था लेकिन अब तक 21 पंचायत भवनों के निर्माण ही हो पाए हैं। अन्य 162 पंचायत भवनों के निर्माण का काम अब भी अधूरा है। अब जबकि प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। अधूरे कार्यों को पूरा कराने की जिम्मेदारी प्रशासक के रूप में तैनात किए गए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को सौंप दी गई है तो निर्माण कार्य भी तेज कर दिए गए हैं। कार्यदायी संस्थाओं को जनवरी अंत तक कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सामुदायिक शौचालयों व पंचायत भवनों के अधूरे कार्यों को इस माह के अंत तक पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण कार्य पूरा न करने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की चेतावनी भी दी गई है। - विशाल सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी, सोनभद्र।