सोनभद्र जिले के वायु प्रदूषण में कमी आई है। प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यावरण सुधीर गर्ग की वर्चुअल मीटिंग के दौरान बुधवार को यह तथ्य सामने आए। प्रमुख सचिव ने अन्य प्रदूषित क्षेत्रों के साथ सोनभद्र की स्थिति की समीक्षा की। 2019-2020 के ऑनलाइन डाटा के आधार पर बताया गया कि एयर क्लीन प्रोग्राम के बाद से हालात सुधरे हैं। 2019 में जिले में औसतन 187 रहने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक़ 173 पर आ गया।
सोनभद्र जिले और सीमा से सटे मध्य प्रदेश के सिंगरौली में 21 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाले बिजलीघर स्थापित होने और इन परियोजनाओं में रोजाना सवा तीन लाख टन कोयला जलाने के कारण प्रदूषण के लिहाज से सोनभद्र का आधे से अधिक भूभाग बेहद संवेदनशील है।
यहां दस कोल परियोजनाओं से रोजाना लाखों टन कोयले के उत्पादन-परिवहन को भी प्रदूषण की मुख्य वजह माना जाता है। सड़क मार्ग से असुरक्षित तरीके से कोयले की ढुलाई से भी समस्या बढ़ जाती है। बिजली घरों से निकलने वाली राख के सुरक्षित निस्तारण का भी प्रबंध नहीं है।