जिले में डीजे और लाउडस्पीकर की तेज आवाज को बंद कराने के पीछे शासन व जिला प्रशासन की सोच चाहे जितनी अच्छी रही हो। लेकिन यह शासनादेश पुलिस महकमे के लिए कमाऊ पुत साबित हो रहा है। किसी भी मांगलिक कार्यक्रम में लोग अनुमति के लिए थाने का चक्कर काटने को मजबूर हैं। पुलिसकर्मी परमिशन देने के नाम पर वसूली कर रहे हैं।
शासन ने बिना परमिशन के मंदिर, मांगलिक कार्यक्रमों में डीजे, लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगा दिया है। ताकि तेज आवाज से लोगों को होने परेशानियों से निजात मिल सकें। मार्च माह में राबर्ट्सगंज तहसील से करीब 205, दुद्धी तहसील से 195 और घोरावल तहसील से 162 डीजी और लाउडस्पीकर बजाने के लिए थानों से रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट लगवाने में अधिकांश लोगों को कई बार थानों का चक्कर लगाना पड़ा। यहीं नहीं रिपोर्ट लगाने के नाम पर पुलिसकर्मियों ने कईयों से यह कर सुविधा शुल्क लिया कि शादी करने जा रहे है खुशी की बात है मिठाई के नाम पर कुछ तो दीजिए।
पुलिस के इस कृत्य से लोगों को परमिशन लेने में काफी समस्याएं हो रही है। इस संबंध में एएसपी अरुण कुमार दीक्षित ने कहा कि डीजे और लाउडस्पीकर का परमिशन देने के नाम पर किसी पुलिसकर्मी द्वारा सुविधा शुल्क लिए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर कोई शिकायत करता है तो जांच कर दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।