ओबरा में आयोजित जलसा में तकरीर करते मोलाना।
- फोटो : सोनभद्र
अंजुमन गुलामाने मुस्तफा के तत्वाधान में इस्लामिया इंटरमीडिएट कालेज में जश्न-ए-ईद मिलादुन्ननबी हुआ। तकरीर में उलेमा ने बुराइयों को दूर करने का एक मात्र रास्ता नमाज को बताया। कहा इस्लाम इंसानियत की राह दिखाता है। जलसे में तीन लोगों की दस्तार बंदी कर उन्हें सनद दी गई।
जलसे का आगाज मौलाना अखलाफ रिजवी व अमजद रजा ने किया। बुलबुले बागे मदीना तनवीर अख्तर ने जलसे ऊंचाईयां प्रदान करते हुए भारत में हैं मुलसमान ख्वाजा तेरे करम से नात पेश कर खूब वाहवाही लूटी। शकील आरवी ने हर पल हर दम जिक्रे सरकार करते हैं नात पेश कर इस्लाम में मां बाप की महत्ता पर प्रकाश डाला। उनकी नात जब-जब जन्नत देखने की ख्वाहिश होती है, हम अपने मां बाप का दीदार करते हैं।
जामिया मीलिया इस्लामिया दिल्ली के मौलाना नबिल, भदोही के मौलाना अब्दुस समद, मुरादाबाद के अकीलुर्रहमान, बिहार के मुजफ्फर रजा ने कहा कि बुराइयों को दूर करने के लिए नमाज ही एक मात्र रास्ता है। इससे लोगों को जन्नत मिल सकती है। इंसानियत की राह इस्लाम दिखाता है। जहां पर कोई बड़ा छोटा, अमीर गरीब नहीं होता है। नमाज के वक्त अमीर, गरीब सभी एक साथ में नमाज पढ़ते हैं। अंत में मदरसा गौसिया के हाफिज मो. रजाउल दुद्धी, हाफिज जुबैर झारखंड, हाफिज मो. अली की दस्तारबंदी की गई।