सोनभद्र। राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र में तीन साल पहले गांजा बरामदगी की कार्रवाई में ढेरों खामियां पाई गई हैं। सुनवाई के दौरान मालखाना रजिस्टर अदालत में परीक्षण के लिए पेश नहीं किया गया। वहीं, जिस झोले में गांजा को सील कर रखा गया था, वह फटा था। कोर्ट में दलील दी गई कि चूहे ने काटा होगा। इस आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। राॅबटर्सगंज कोतवाली पुलिस ने 28 अगस्त 2022 की रात ढाई बजे कम्हारी में घोरावल रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास से गांजे की बरामदगी दिखाई थी। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के कब्जे से मादक पदार्थ की बरामदगी की जाती है तो धारा-42 एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपी की गिरफ्तारी से पूर्व राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होती है, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। अभियोजन का दायित्व है कि जो नमूना जांच के लिए सुरक्षित रखा जाता है, उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ न होने पाए लेकिन मालखाना रजिस्टर कोर्ट में पेश नहीं किया गया।
वहीं, जांच के लिए निकाले गए नमूने को चौथे दिन विधि विज्ञान प्रयोगशाला में सौंपा गया। इस बीच नमूना कहां और किसकी अभिरक्षा में था, इसकी सही जानकारी कोर्ट को नहीं दी गई। वहीं, अदालत में पेश किए गया गांजे का झोला फटा हुआ था। इस पर कोर्ट ने सवाल पूछा तो पुलिस ने कहा कि चूहे ने काटा होगा। कोर्ट ने विवेचना में कमियां बताते हुए आरोपी भइया लाल यादव, निवासी राबर्ट्सगंज को बरी करने का आदेश दिया। संवाद