या देवी सर्वभूतेषु प्रकृतिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: बीजमंत्र के साथ त्याग, संयम और समर्पण का महापर्व नवरात्र शनिवार से शुरू हो गया।
पहले दिन मां के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना की गई। देवी मंदिरों में भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। घरों और मंदिरों में कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती के पाठ की भी शुरुआत की गई। शक्तिपीठ और सिद्धपीठों में मेले का आलम रहा। भक्तों ने मां को नारियल, चुनरी एवं अन्य सामग्री अर्पण कर सुख-समृद्धि की कामना की। प्रमुख देवी धामों में सुरक्षा को लेकर कड़े प्रबंध बनाए रखे गए।
देवी के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश सीमा पर स्थित मां ज्वालामुखी धाम में अलसुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही।
यहां जनपद के साथ ही पूर्वांचल और मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेका और मंगल की कामना की। मंदिर के बरामदे में सामूहिक रूप से दुर्गा सप्तशती के पाठ का भी क्रम जारी रहा।
प्रधान पुजारी श्लोक मिश्रा के मुताबिक भोर में साढ़े तीन बजे मां के शृृंगार और मंगला आरती के बाद मंदिर के पट खोल दिए। दोपहर में एक से दो, शाम को छह से साढ़े बजे तक भी पट बंद रखकर मां का शृृंगार किया गया।
रात दस बजे मंदिर के पट बंद कर दिए गए। बताया कि यह क्रम नवरात्र तक चलता रहा। इसी तरह मप्र की सीमा से सटे चोपन क्षेत्र के कुंडवासिनी धाम में भी सुबह से ही भक्तों का रेला उमड़ा रहा।
दोनों जगह पूजन-सामग्री की दुकानों के साथ ही खान-पान, खिलौने एवं जरूरत के सामानों की सजी दुकानें मेले का माहौल बनाए रही।
डाला स्थित वैष्णो धाम और कोल क्षेत्र स्थित अमिला धाम में भी अलसुबह से भक्तों का तांता लगा रहा। जय माता दी के जयकारे के साथ भक्तों की टोली गर्भगृह में मां के अलौकिक स्वरूप के दर्शन-पूजन के साथ भजन-कीर्तन में जुटी रही।
इसी तरह राबर्ट्सगंज के शीतला माता मंदिर, पूरब मोहाल के सातो शीतला मंदिर, अंबेडकर नगर के कड़े शीतला मंदिर में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही।
मां के दर्शन-पूजन के साथ ही घरों में विधि-विधान से कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती के पाठ की शुरुआत की गई। तमाम श्रद्धालुओं ने पहले दिन व्रत रहकर मां के प्रति श्रद्धा जताई। अनपरा में बाजार स्थित दुर्गा मंदिर, डिबुलगंज स्थित दुर्गा मंदिर, औड़ी स्थित दुराशनी मंदिर पर भी सुबह से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला रात तक जारी रहा।