ओबरा में निर्जला एकादशी पर गुरुवार को राहगीरों को शर्बत पिलाते लायंस क्लब के सदस्य।
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निर्जला एकादशी पर गुरुवार को व्रत रखकर श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सुख समृदि्ध् की कामना की। सुबह से ही राबर्ट्सगंज स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर, बरैला स्थित राधा-कृष्ण मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार गौ दान और घड़े में पानी भरकर पुरोहितों को दान दिया। इसके अलावा पुरोहितों को भोजन कराकर वस्त्र और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया। मान्यता है कि इस कठिन व्रत के करने से मनवांछित फल मिलता है।
निर्जला एकादशी व्रत को भीमसेनी एकादशी व्रत भी कहा जाता है। पुरोहित डॉ. कृष्णानंद त्रिपाठी बताते हैं कि अगस्त, कुंभकर्ण, हनुमान, बड़वानल और भीम ऐसे थे जो सबसे ज्यादा आहार करने वालों में इनकी गणना होती थी। जब भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि बारह मास करने से अच्छा है कि सिर्फ एक ही बार व्रत किया जाए तो सभी का फल मिल जाएगा। इसीलिए इसे भीमसेनी एकादशी व्रत भी कहा जाता है। गुरुवार को सुबह 9:36 बजे तक ही एकादशी तिथि रही, लेकिन कोई भी व्रत उदया तिथि में लिया जाता है। इसकी वजह से गुरुवार को ही निर्जला एकादशी का व्रत श्रद्धालुओं ने रखा।