समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों को भुगतान के लिए सरकारी दफ्तरों का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। केंद्र प्रभारी आरटीजेएस के माध्यम से किसानों के खाते में गेहूं खरीद का मूल्य भेजेंगे। इसके लिए जिला प्रशासन ने सभी केेंद्रों 15 से 20 लाख रुपये उपलब्ध करा दिया है। उधर, 44 दिनों में 950 कुंतल गेहूं की खरीद हो सकी है।
2015-16 में जिले में 40 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित है। पीसीएफ के 30 क्रय केंद्र, मार्केटिंग के सात, कर्मचारी कल्याण निगम के दो और एफसीआई का एक क्रय केंद्र खोले गए हैं। सभी केेंद्र प्रभारियों को सख्त निर्देश है कि किसानों को पेयजल, धूप से बचने आदि की समुचित व्यवस्था करें। इसके बावजूद केंद्रों पर किसानों को सुविधाएं न के बराबर मिल रही है। इसका नतीजा यह है कि एक अप्रैल से केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू हुई, लेकिन अभी तक नाममात्र की गेहूं का खरीद हुई है।
जिम्मेदरान गेहूं खरीद कम होने की मुख्य वजह समर्थन मूल्य से अधिक दर पर बाजारों में गेहूं बिकने की बात कह कर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। वहीं शासन और जिला प्रशासन ने क्रय केेंद्रों पर अधिक से अधिक गेहूं क्रय करने के लिए केंद्र प्रभारियों को किसानों को भुगतान तत्काल करने का निर्देेश दिया है। जिला विपणन अधिकारी महेश श्रीवास्तव का कहना है कि सभी क्रय केंद्रों पर किसानों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन है। गेहूं का तौल कराने के बाद किसान जैसे प्रभारियों को अपने बैंक का खाता नंबर देंगे उनके खाते मेें तत्काल धन चला जाएगा। उन्होंने कहा कि गेहूं बेचने में किसानों को किसी प्रकार की समस्याएं न हो, इसका पूरा ध्यान दिया जा रहा है।