नगर पंचायत कार्यालय से 14 जून को जारी हुए 20 कार्यों के लिए करीब 70 लाख रुपये की टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। संविदाकारों ने मनमानी का आरोप लगाते हुए टेंडर की तिथि बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। अब आननफानन इसे निरस्त कर दिया गया है।
बीते 14 जून को नगर पंचायत कार्यालय ने 20 कार्यों के लिए करीब 70 लाख रुपये का टेंडर प्रकाशित कराया था। नगर के संविदाकार अखिलेश यादव समेत अन्य संविदाकारों का आरोप है कि 15 जून को प्रकाशित टेंडर में डॉक्यूमेंट बिड उपलब्ध कराने के लिए 15 जून को शाम पांच बजे तक की ही तिथि दी गई थी। निविदा फार्म कार्यालय में कब से कब तक प्राप्त किया जाएगा, इसकी स्पष्ट तिथि भी नहीं थी। इस नाते भ्रम की स्थिति बनी रही। जब भी संविदाकार कार्यालय गए तो वहां उन्हें निविदा फार्म नहीं मिल सका। इस दौरान चहेते ठेकेदारों को बुलाकर ईओ ने फार्म दिया। जबकि अन्य संविदाकारों को फार्म नहीं उपलब्ध कराया गया। अंतिम तिथि के दिन जब ईओ कार्यालय आईं और निविदा बॉक्स को खोलने का समय आया तो उन्होंने कहा कि समय खत्म हो गया है अब फॉर्म नहीं जमा होगा। टेंडर प्रक्रिया को संदिग्ध मानते हुए संविदाकारों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की। आरोप है कि टेंडर का फार्म ऐसे संविदाकारों को दिया गया है जिन पर पूर्व में कराए गए कार्यों में बड़ी गड़बड़ी का आरोप है। ऐसे ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड न करते हुए उन्हें नया कार्य आवंटित किया जा रहा है। इस संबंध में नगर पंचायत अध्यक्ष निशा सिंह ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी गई है। अब नए सिरे से कार्यों के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे।