आरोप है कि संबंधित के फोन लगातार घनघनाए जाते रहे लेकिन कोई स्वास्थ्य कर्मी नजर नहीं आया। दर्द से छटपटा रही महिला को भोर में 3.42 बजे के करीब सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इसके लगभग 20 मिनट बाद एएनएम पहुंची। तब अस्पताल का ताला खोलकर भर्ती की प्रक्रिया अपनाई गई। आरोप है कि लापरवाही के बावजूद परिवार वालों से दस्तूर यानी मिठाई खाने के लिए पैसे मांगे गए।
पीएचसी परिसर में अलग से आवासीय व्यवस्था नहीं है। इसलिए जिस एएनएम के क्षेत्र से प्रसव का मामला सामने आता है, उसे अस्पताल पहुंचकर प्रसव कराना पड़ता है। लापरवाही क्यूं और किस स्तर पर हुई, इसकी जानकारी की जाएगी। - राणा रणधीर प्रभारी पीएचसी बीजपुर।
प्रकरण संज्ञान में है। सीएचसी म्योरपुर के अधीक्षक से जांच रिपोर्ट तलब की गई है। जो स्थिति सामने आएगी, उसके अनुरूप कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।