ओबरा में इसी बोलेरो में प्रसूता ने बच्चे को दिया जन्म। स्रोत स्वयं
ओबरा । नगर के डिग्री कॉलेज के समीप रविवार की सुबह एक महिला का बोलेरो में ही प्रसव हो गया। परिजन उसे लेकर अस्पताल जा रहे थे। सड़क खराब होने से गांव में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई थी। गर्भवती महिला के साथ बोलेरो में मौजूद आशा ने सूझ-बूझ से प्रसव कराया। महिला को चोपन सीएचसी में भर्ती कराया गया है।
रेणुकापार के पनारी गांव के खाड़र टोला निवासी भोला सिंह ने बताया कि रविवार की सुबह नौ बजे पत्नी सुभासी देवी को प्रसव पीड़ा होने लगी। सड़क खराब होने के कारण क्षेत्र में सरकारी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। इसकी वजह से निजी साधन से पत्नी को लेकर चोपन सीएचसी के लिए निकले थे। प्रसव पीड़ा अधिक होने पर बोलेरो में ही पत्नी ने बेटे को जन्म दे दिया। महेंद्र सिंह ने बताया कि बताया कि आपात स्थिति में गांव वाले पहले कई बार एंबुलेंस को कॉल कर चुके हैं, लेकिन हर बार एंबुलेंस नहीं आने की वजह से अब गांव वालों ने एंबुलेंस को कॉल करना ही बंद कर दिया है। विवशता में लोग इलाज के लिए निजी साधन से अस्पताल जाते हैं।
रेणुकापार के इलाकों में काफी समय से एंबुलेंस नहीं जा पा रही है। इसकी वजह की जानकारी हमें नहीं है। फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। सुभाष चंद्रा, अधीक्षक चोपन सीएचसी।
साल 2020 में हुआ था सड़क निर्माण के लिए टेंडर
रेणुकापार के आदिवासी अंचल के लिए सबसे महत्वपूर्ण सड़क मार्ग के तौर पर खेवधा-कड़िया-परसोई मार्ग के निर्माण में लगातार देरी हो रही है। यह सड़क रेणुकापार क्षेत्र के 100 से भी अधिक टोलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। लंबे समय से आदिवासी विकास मंच इस क्षेत्र की इस प्रमुख समस्या के लिए आंदोलित है। आदिवासी विकास मंच के संयोजक हरदेव नारायण तिवारी ने बताया कि इस सड़क की खस्ता हालत ने दो लाख की आबादी को मुसीबत में डाल रखा है। वर्ष 2020 में इस सड़क का टेंडर हुआ था, लेकिन पांच वर्ष बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। सड़क के निर्माण में देरी के कारण यातायात में बाधा हो रही है। ग्राम पंचायत पनारी के प्रधान प्रतिनिधि लक्ष्मण यादव ने कहा कि खेवधा-कड़िया-परसोई मार्ग की जर्जरता के कारण रेणुकापार के 50 से ज्यादा टोलों तक एंबुलेंस सेवा फिलहाल बंद है।