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प्रदूषण्ा वाले इलाकों में पेयजल संकट

Mon, 15 Feb 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो सोनभद्र
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एनजीटी के आदेश के बाद भी जनपद के अति प्रदूषित इलाकों के अधिकांश हिस्सों में स्वच्छ पेयजल का संकट बरकरार है। अनपरा इलाके के भाठ क्षेत्र और ओबरा के रेणुकापार अंचल को पेयजल परियोजनाओं से संतृप्त करने की जहां अब तक जरूरत नहीं समझी जा सकी है।
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वहीं अनपरा-शक्तिनगर परिक्षेत्र में भी पाइपलाइन पेयजल परियोजनाएं अस्तित्व में नहीं आ सकी है। यह हालत तब है जब एनजीटी ने प्रदूषण प्रभावित इलाके के प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का आदेश दे रखा है। बावजूद वर्षों से अभिशप्त जीवन जी रहे भाठ-रेणुकापार क्षेत्र के बाशिंदे अभी भी उसी हाल में जीवन जीने को मजबूर हैं।

 
भाठ क्षेत्र की करीब चालीस किमी एरिया ओबरा और अनपरा के बीच स्थित है। इस एरिया के दोनों छोर पर बिजली परियोजनाएं तथा बाएं तरफ कोयला और दाएं तरफ अल्युमीनियम, केमिकल एवं अन्य कल-कारखाने स्थित हैं। बावजूद इस एरिया में अभी भी चुआड़ और नालों का पानी ही जिंदगी का सहारा बना हुआ है।
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जहां हैंडपंप की सुविधा है भी तो वह पानी मानव जीवन के लिए कितना सुरक्षित है, इसको भी अब तक नहीं परखा जा सका है। इसी तरह ओबरा अंचल का मध्यप्रदेश और सोन, रेणु और बिजुल के बीच का 40 से 50 किमी इलाका भी पेयजल परियोजनाओं से अछूता बना हुआ है।


जबकि इस एरिया का भी अधिकांश हिस्सा प्रदूषण का दंश झेलने को विवश हैं। मजबूरन यहां के बाशिंदे नदी, नाला, चुआड़ या हैंडपंपों का प्रदूषित पानी पीने को विवश हैं।


भाठ क्षेत्र के कुलडोमरी में 50 करोड़ की लागत से पाइपलाइन पेयजल परियोजना के लिए एक वर्ष पूर्व डीएम स्तर से घोषणा भी हुई, लेकिन अभी इस पर अमल नहीं हो पाया।


हालत यह है कि 47 टोलों वाले कुलडोमरी के साथ ही कुबरी, रणहोर, पनारी, परसोई, कनहरा, अमरसोता, जुगैल सहित इलके कई गांवों में पेयजल संकट विकराल रूप लेता जा रहा है। लोग दूषित पानी पीने को मजबूर है।
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