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कार्यकाल खत्म होने के पहले बजट खपाने की जुगत में प्रधान

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सोनभद्र। जिले के 637 ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे में ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में तेजी ला दी गई है। पंचायत निधि में मौजूद धनराशि को तेजी से खपाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों की तरफ से भी कराए जा रहे कार्यों पर नजर रखी जा रही है। पूर्व के लंबित भुगतान को भी शीघ्र कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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25 दिसंबर को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव तक के लिए ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे। कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायत निधि के आहरण पर भी रोक लग जाएगी। इसे देखते हुए प्रधान और सचिव दोनों युद्ध स्तर पर कार्यों को कराने और ग्राम पंचायत के खाते में मौजूद धनराशि को खपाने में लगे हैं। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिले की 637 ग्राम पंचायतों के लिए दो किस्त में करीब 34 करोड़ रुपये जारी किए गए। पेयजल, स्वच्छता आदि पर यह धनराशि खर्च की जा रही है। वहीं अक्टूबर 2019 में पंचम वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य के लिए सात करोड़ 61 लाख रुपये जारी किए गए। पिछले माह तक पंचम वित्त आयेाग की करीब आधी धनराशि बची हुई थी। इसी तरह 15वें वित्त आयोग की बड़ी रकम खातों में पड़ी है। साइट की तकनीकी दिक्कत से भी कई कार्यों के भुगतान रूके पड़े हैं। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने पर पुराने भुगतान को लेकर और दिक्कत बढ़ जाएगी। इसलिए जहां पूर्व की बकाया धनराशि के शीघ्र भुगतान करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं अवशेष नाली, खड़ंजा समेत अन्य कार्यों व स्वीकृत नए कार्यों को भी कराने की होड़ मची हुई है।
जो भी कार्य कराए जा रहे हैं, उसकी निगरानी की जा रही है। चूंकि प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। इसलिए अवशेष कार्य शीघ्र पूरे हों, इस पर ध्यान दिया जा रहा है। - विशाल सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी, सोनभद्र।
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