अनपरा/रेणुकूट/दुद्धी/चुर्क। ठंड के तेवर अचानक से बढ़े हैं। पिछले तीन दिनों से न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे बना हुआ है। हाड़ कंपाने वाली ठंड के बावजूद जिले की निकायों में बचाव की मुकम्मल तैयारी नहीं हो पाई है।
कहीं रैन बसेरा नहीं बना है तो कहीं उस पर ताला लटक रहा है। अलाव के लिए टेंडर प्रक्रिया भी अभी कागजों में ही है। नतीजा दूरदराज से आने वाले राहगीरों, असहाय लोगों को ठंड में ठिठुरते हुए रात बितानी पड़ रही है। हालांकि जिम्मेदारों की दलील है कि रैन बसेरा में लोग नहीं आ रहे, इसलिए ताला बंद किया गया है।
अमूमन हर साल दिसंबर में कड़ाके की ठंड पड़ती है। लिहाजा इससे बचाव की तैयारी भी पहले से ही पूरी करने के निर्देश रहे हैं। सभी निकायों को अलाव, रैन बसेरा के लिए आवश्यक तैयारियों को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से हिदायत भी दी जा चुकी है।
अभी तक निकायों में सुस्ती बरती जा रही है। अनपरा नगर में अभी तक अलाव की व्यवस्था नहीं हो पाई है। बस अड्डा से लेकर सभी चौराहों, सरकारी अस्पताल, थाने पर रात में लोग ठंड से ठिठुर रहे हैं। कुछ स्थानों पर दुकानदार स्वयं से अलाव जला रहे हैं। यही हाल रैन बसेरा का भी है।
औड़ी मोड़ के पास बने स्थायी रैन बसेरा अभी तक नहीं खुल पाया है। रविवार की दोपहर में इस पर ताला लटकता मिला। इससे रात में ठंड से ठिठुरने वाले लोगों को रुपये खर्च कर महंगे होटलों में ठहरना पड़ रहा है। उधर, रेणुकूट में अब तक रैन बसेरा नहीं बन पाया है। यहां स्टेशन के पास जिस भवन में रैन बसेरा बनता है, उसका स्वामित्व रेलवे के पास है।