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Sonebhadra News: बैंकों से लोन लेकर देना भूले, 58552 खाते हुए एनपीए, 43 हजार सिर्फ कृषि ऋण के

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बैंकों से लोन लेकर जमा न करने वालों की जिले में लंबी फेहरिश्त है। करीब 58 हजार से अधिक खाते ऐसे हैं, जिन्हें एनपीए की श्रेणी में रखा गया है। यह कुल लोन खातों का करीब 25 फीसदी है। इन खातों पर बैंकों का 551 करोड़ रुपये बकाया है।
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इसमें सबसे ज्यादा 43 हजार खाते के बकाएदार कृषि ऋण के हैं। इन पर 409 करोड़ रुपये बाकी हैं। बैंक लगातार बकाएदारों से ऋण राशि जमा कराने की कोशिश कर रहे हैं, मगर सफलता नहीं मिल रही। बकाया जमा न करने वाले ज्यादातर किसान इस उम्मीद में हैं कि सरकार पूर्व की तरह ही बकाया माफ करेगी तो उन्हें लाभ मिल जाएगा।
खेती-किसानी, रोजगार, शिक्षा सहित अन्य कार्यों के लिए बैंक लोगों को ऋण मुहैया कराते हैं। ग्राहकों को निर्धारित समय सीमा में ब्याज समेत ऋण राशि लौटानी पड़ती है।
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यह रुपये जमा न करने पर बैंक खाते को एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर वसूली की कार्रवाई शुरू करता है। जिले में एनपीए घोषित खातों की संख्या 58 हजार से अधिक है।
आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में निजी व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 192 शाखाओं से विभिन्न कार्यों के लिए 237972 खातों में 5890 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है। इसमें से 58552 खातों पर 551.77 करोड़ रुपये लंबे समय से बकाया है।
खाताधारक समय सीमा पूरी होने के बाद भी न मूल राशि जमा कर रहे हैं और न ही ब्याज देने में रुचि दिखा रहे हैं। एनपीए की श्रेणी में शामिल सबसे ज्यादा खाते कृषि ऋण से जुड़े हैं। इस क्षेत्र के 43379 खातों में 409.22 करोड़ रुपये बकाया है।
इसके बाद मुद्रा योजना के तहत ऋण का 70.38 करोड़ रुपये बकाया है। कृषि ऋण के ज्यादातर बकाएदार इस उम्मीद में पैसे जमा नहीं कर रहे कि सरकार उनका ऋण माफ कर देगी। पूर्व में भी बहुत से किसानों ने अपना ऋण जमा कर दिया था। जब उन्हें सरकार की कर्ज माफी योजना का विशेष लाभ नहीं मिल पाया था।

खेती के लिए लोन लिया, बनवाया मकान
बैंकों से किसानों को उनकी जोत के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण दिया जाता है। अन्य सभी तरह के ऋण के सापेक्ष केसीसी पर ब्याज दर सबसे कम है। इसे पाना भी अन्य ऋण की तुलना में आसान है। लिहाजा केसीसी पर लोग लेकर तमाम किसानों ने इसे दूसरे कार्यों में खर्च कर दिया है। किसी ने मकान बनवा लिया तो किसी ने दुकान खोल लिया या जमीन खरीद ली। इलाज पर भी धनराशि खर्च कर दी गई है। अब खाते एनपीए होने के बाद बैंककर्मी जब वसूली के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें कोई न कोई दलील देकर टाल दिया जाता है। लघु सीमांत श्रेणी के इन बकाएदारों पर बैंक सख्ती भी नहीं कर पाते।

ऋण देने से हिचकते हैं बैंक
जरूरत के लिए बैंकों से ऋण लेने के बाद उसे जमा न करने से बड़ी संख्या में खातों के एनपीए होने का असर दूसरे ग्राहकों को भुगतना पड़ता है। वह वाजिब कार्यों के लिए भी लोन लेने बैंकों में जाते हैं तो उन्होंने गहरी जांच-परख से गुजरता पड़ता है। कई बैंक उनके आवेदनों को सीधे खारिज कर देते हैं। जिला उद्योग केंद्र से संचालित स्वरोजगार की योजनाओं, एनआरएलएम में समूहों को वित्तीय मदद जैसे अन्य योजनाओं के तहत आवेदनों के खारिज या लंबित होने की बड़ी वजह एनपीए खाते भी हैं।

किस बैंक के कितने खाते एनपीए::
प्रमुख बैंक: एनपीए खाते: जमा राशि (लाख में)
इंडियन बैंक: 25445: 28617
बैंक ऑफ बड़ौदा: 1297: 1969
बैंक ऑफ इंडिया: 1463: 2861
पंजाब नेशनल बैंक: 1475: 1747
एसबीआई: 1447: 1628
यूको बैंक: 1496: 2722

प्राइवेट बैंकों में बकाया 55 करोड़
सबसे ज्यादा एनपीए खाते राष्ट्रीय कृत बैंकों के हैं। कुल 12 बैंकों की 108 शाखाओं में 34244 खातों में 419 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं नौ प्राइवेट बैंक की 36 शाखाओं के 12487 खाते एनपीए हैं, जिसमें 55.58 करोड़ रुपये बकाया हैं। प्राइवेट बैंक में सबसे ज्यादा 7245 एनपीए खाते इंडुस बैंक के हैं। दूसरे नंबर पर बंधन बैंक है, जिसमें 3152 खाते एनपीए हैं।

एनपीए खातों में बकाया राशि जमा कराने के लिए संबंधित बैंक शाखाओं की ओर से नियमित प्रयास किए जा रहे हैं। इसके चलते राशि जमा भी हो रही हैं। जो खाते लंबे समय से एनपीए में हैं, उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई भी जाती है। समय-समय पर लोक अदालत के माध्यम से भी ब्याज में छूट देते हुए बकाया जमा कराने का प्रयास होता है। -सलन बागे, लीड बैंक प्रबंधक।
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