कमेटी गांव-गांव जाकर प्रदूषण से प्रभावित लोगों से दावे लेगी और बीमारी की गंभीरता के आधार पर क्षतिपूर्ति तय करने की प्रक्रिया पूरी करेगी। एनजीटी ने प्रभावित आबादी के लिए आसानी से पहुंच योग्य स्थान पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से युक्त मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने का निर्देश भी राज्य सरकार को दिया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आयुष्मान कार्ड के साथ प्रभावित आबादी को सरकारी अस्पतालों और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसलिए क्षतिपूर्ति की आवश्यकता नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि यह रुख स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव झेल रहे लोगों को मुआवजा देने से इन्कार करने जैसा है। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
वर्ष 2024 में सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर सोनभद्र में स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रदूषण के प्रभाव का अध्ययन कराने, प्रभावित लोगों को राहत देने और वर्ष 2018 में पारित आदेश में दिए गए सुझावों का सख्ती से अनुपालन कराने की मांग की थी। इसके बाद एम्स भोपाल की टीम ने अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें प्रदूषण प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर बताई गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने एम्स की रिपोर्ट को अपर्याप्त बताया था।
10 लाख की आबादी प्रदूषण से प्रभावित
सोनभद्र जिले में लगभग 10 लाख की आबादी प्रदूषण से प्रभावित है। विभिन्न जांच रिपोर्ट के अनुसार, कोन, बभनी, म्योरपुर और दुद्धी ब्लॉक के लगभग 276 गांवों की दो लाख से अधिक आबादी गंभीर रूप से प्रदूषण की चपेट में है। वायु, जल और मृदा तीनों में गंभीर प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए सोनभद्र और इससे सटे सिंगरौली क्षेत्र को देश के अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल किया गया है। एनजीटी की ओर से गठित कोर कमेटी ने वर्ष 2014-15 के अध्ययन में माना था कि सोनभद्र के 276 गांवों की दो लाख से अधिक आबादी गंभीर संकट (अत्यधिक फ्लोराइड व अन्य भारी धातुओं के प्रदूषण) का सामना कर रही है।
दावे पर राज्य के अधिकारियों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। उपलब्ध दस्तावेजों और चिकित्सा विशेषज्ञों की राय के आधार पर स्वास्थ्य समस्या की गंभीरता तय की जाएगी। मामलों को गंभीरता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकेगा। क्षतिपूर्ति तय करते समय बीमारी की गंभीरता, उसका अस्थायी या स्थायी स्वरूप, पीड़ित की आयु और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।
अधिकारी बोले
एनजीटी के आदेश के इस संबंध में दिशा-निर्देश अभी आना बाकी है। उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलते ही उप समिति के गठन सहित अन्य प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। -इं. आरके सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
वर्षों से प्रदूषण का दुष्प्रभाव झेल रहे सोनभद्र के लोगों के लिए एनजीटी का यह निर्देश महत्वपूर्ण है। एनजीटी और संबंधित समिति के सामने देश के नामचीन विशेषज्ञों की सेवाएं लेने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हमारी टीम समिति के सहयोग के लिए तत्पर है। -रामेश्वर प्रसाद, संयोजक, सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी