प्रदेश में शीतलहर के बढ़ते प्रकोप से बिजली की मांग बढ़ी तो सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर महीनों से बंद इकाइयों को चालू किया जाने लगा है। पारीछा बी व सी बिजली घर से उत्पादन शुरू होने से निगम का उत्पादन बढ़कर चार हजार मेगावाट के करीब पहुंच गया है।
सितंबर महीने में बिजली घरों में व्याप्त कोयला संकट के बाद सूबे में बिजली की मांग में कमी को देखते हुए सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर पारीछा व हरदुआगंज की इकाइयों को बंद करा दिया गया था। दो दिन से प्रदेश में शीतलहर के कारण बिजली की मांग में एक हजार मेगावाट से अधिक इजाफा हुआ है। बृहस्पतिवार सुबह प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 17497 मेगावाट दर्ज की गई। इससे पूर्व बुधवार सुबह भी बिजली की मांग 17 हजार मेगावाट से अधिक थी। इसे देखते हुए पारीछा बी व सी की इकाइयों को तत्काल लोड पर लेने का निर्देश जारी किया गया। पारीछा विद्युत गृह के सीजीएम इं. एमके सचान ने बताया कि बुधवार शाम को ही इकाइयों को लाइटअप किया गया था। रात में एक बजे इकाइयों को सिंक्रोनाइज कर लिया गया। हालांकि तकनीकी खराबी के कारण बृहस्पतिवार को 250 मेवा की छठीं इकाई ट्रिप कर गई। इसका अनुरक्षण किया जा रहा है। शुक्रवार को इसे भी लाइटअप कर लिया जाएगा। पारीछा की इकाइयों के उत्पादनरत होने व हरदुआगंज ई परियोजना से बगैर कमीशनिंग के ही 500 मेवा से अधिक उत्पादन होने के कारण निगम का उत्पादन बढ़कर 3775 मेगावाट पहुंच गया है। अनपरा की सभी इकाइयों से भी पूर्ण क्षमता से उत्पादन किया जा रहा है।