कोन में स्थित जर्जर पंचायत भवन, जिसमें खड़ा ठेला।
पंचायतीराज को साकार करने के लिए सरकारों ने कई कदम उठाए हैं। इसी के तहत जिले की ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बनाए गए। यहां से सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों को दिया जाना था। लेकिन ये भवन जर्जर और बेकार पड़े हुए हैं। कई भवनों पर दूसरों ने कब्जा जमा लिया है। अफसरों का भी ध्यान इस ओर नहीं हैं, जिससे भवन बेकार हो रहे हैं।
ग्राम पंचायत से जुड़े कार्यों को एक छत के नीचे संचालित करने के लिए पंचायत राज विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का निर्माण कराया गया। इसमें ग्राम पंचायत अधिकारी, एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी, लेखपाल आदि को बैठकर ग्रामीणों की समस्या का निस्तारण करना था। ग्राम प्रधान को यहां खुली बैठक आयोजित करानी थी लेकिन जिले की ज्यादातर ग्राम पंचायत भवनों पर ऐसा कुछ नहीं होता है। वर्षों पूर्व कई ग्राम पंचायतों में बने पंचायत भवन तो जर्जर हो गए हैं। उनकी मरम्मत भी नहीं हो रही।
कोन: ग्राम पंचायत भवन की दीवारें जर्जर हो गई हैं। यहां किसी के न बैठने के कारण भवन की छांव में कोई ठेला खड़ा कर जाता है तो कोई रात में मवेशियों को बांध देता है। सेक्रेटरी और प्रधान भी यहां नहीं बैठते और न ही भवन की सफाई, मरम्मत पर किसी का ध्यान है। इसी तरह सदर ब्लाक के उरमौरा गांव में पंचायत भवन में वर्षों से सफाई कर्मियों का कब्जा है। हालांकि यहां भवन पर अक्सर बैठक भी होती रहती है।
रामगढ़/खलियारी: नगवां ब्लॉक के डोरिया, खोड़ैला गांवों का भी पंचायत भवन जर्जर है। कोन प्रतिनिधि के अनुसार कोन और घोरिया ग्राम पंचायत के भवन जर्जर हैं। उधर चोपन के एडीओ पंचायत प्रेमदास का कहना है कि उन्होंने देखा है कि कुछ ग्राम पंचायत भवन जर्जर हैं। उनकी मरम्मत कराई जाएगी। यदि मरम्मत के लायक नहीं होंगे तो अलग से निर्माण के लिए शासन से बजट की मांग की जाएगी।