सोनभद्र। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शासन के निर्देश पर जिले में भी नौ निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील तो कर दिया गया, लेकिन वहां व्यवस्थाएं कम हैं। इन अस्पतालों में आक्सीजन सिलिंडर न होने या कम होने के कारण कोविड-19 के मरीज भर्ती नहीं लिए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में एकमात्र जिले का कोविड-19 एल-टू अस्पताल ही लोगों की उम्मीद बना हुआ है। अब तो आलम यह हो गया कि इन निजी अस्पतालों में सामान्य मरीजों को भी भर्ती लेने या इलाज करने में अस्पताल प्रबंधन के लोग आनाकानी कर रहे हैं।
बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग की हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि कोरोना के बढ़ते मरीजों का उपचार करने के लिए प्राईवेट अस्पतालों को भी कोविड अस्पताल बनाया जाए। यहां आक्सीजन सपोर्ट की भी व्यवस्था दी जाए। उसी के तहत कोविड मरीजों का इलाज करने के लिए तत्काल प्रभाव से नौ प्राईवेट अस्पतालों को तय कर लिया गया। हर जगह नोडल अधिकारी भी लगा दिए गए। साथ ही नॉन कोविड मरीज जिन्हें आक्सीजन की कमी है, एल-2 स्तर का इलाज अपने चिकित्सालयों में करने के लिए कहा गया। इन अस्पतालों में कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के इलाज के लिए अलग-अलग वार्ड व्यवस्था कर दी गई हैं। कुछ निजी अस्पताल के संचालकों ने बताया कि आक्सीजन की कमी है। कहीं से एक-दो सिलेंडर मिल भी जा रहा है तो उससे बहुत देर तक काम नहीं चल पाता। प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीके अग्रवाल ने कहा कि जहां आक्सीजन की कमी है उसे दूर किया जा रहा है। सभी अस्पतालों के लिए अलाटमेंट कर दिया गया है।
इन अस्पतालों को कोविड अस्पताल बनाया गया है। इसमें धन्वंतरि हॉस्पिटल एनटीपीसी रिहंद, हिंडालको हॉस्पिटल रेनुकूट, संजीवनी चिकित्सालय एनटीपीसी शक्तिनगर, जीवन ज्योति मशीही अस्पताल रावर्ट्सगंज, कीर्तिपाली हॉस्पिटल राबर्ट्सगंज, सोनभद्र मल्टी स्पेशलिटी राबर्ट्सगंज, साई हॉस्पिटल राबर्ट्सगंज, रेनुपावर हॉस्पिटल रेनूसागर, प्रभव सर्जिकल हॉस्पिटल उरमौरा को कोविड अस्पताल बनाया गया है। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि चिन्हित अस्पताल अपने यहां आने वाले मरीजों को भर्ती करने से मना नही करेंगे तथा विशेष परिस्थिति में अन्य एल 2 अथवा एल-3 चिकित्सालय में रेफर करने से पूर्व संबंधित चिकित्सालय में भर्ती के लिए वेड की उपलब्धता की स्थिति पता कर लेगें। ताकि रेफर करने के बाद मरीज को वेड के लिए भटकना नहीं पड़े। सभी चिकित्सालयों को राज्य स्तर से समय-समय पर जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य होगा। उक्त आदेश जन स्वास्थ्य की सुरक्षा के दृष्टिगत जारी किया गया है। इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। जिन अस्पतालों में आक्सीजन की कमी है उसे दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।