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Sonebhadra News: तत्कालीन ओबरा एसओ पर केस दर्ज करने का आदेश

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साढ़े 16 वर्ष पूर्व ओबरा थाने में हुई ललई प्रसाद की मौत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय राहुल मिश्रा की अदालत ने पुलिस की लापरवाही मानते हुए तत्कालीन ओबरा एसओ रहे दिवाकर सिंह पर केस दर्ज कराने का आदेश एसपी को दिया है। कोर्ट ने माना कि इलाज के अभाव में मौत हुई थी।
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16 अप्रैल 2006 को शाम 4 बजे ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली गांव निवासी ललई प्रसाद को बिल्ली गजराजनगर निवासी गुड्डू अपने घर के लोगों के साथ लाठी, डंडे व सबल से मारपीट कर घायल कर दिया। जब ललई प्रसाद के बेटे राजबहादुर ने ओबरा थाने पर घटना की सूचना दिया तो ओबरा के तत्कालीन एसओ रहे दिवाकर सिंह ने उल्टा ही उसके पिता ललई प्रसाद को थाने पर बैठा लिया। दवा इलाज के लिए आग्रह करता रहा, लेकिन एसओ ने एक न सुनी। बल्कि गाली देकर भगा दिया। जिसका नतीजा हुआ कि उसके पिता ललई प्रसाद की इलाज के अभाव में 17 अप्रैल 2006 को मौत हो गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों राजबहादुर, छोटी, राजपति के बयान का अवलोकन करते हुए माना कि तत्कालीन ओबरा एसओ रहे दिवाकर सिंह ने अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया है। अभियुक्तगणों को थाने पर बुलाकर छोड़ दिए जाने और प्राणघातक चोट लगने के बावजूद ललई प्रसाद का दवा इलाज नहीं कराने के चलते मौत हुई है। इस मामले में कोर्ट ने तत्कालीन ओबरा एसओ रहे दिवाकर सिंह के विरुद्ध आईपीसी की धारा 304 क के तहत एफआईआर दर्ज कराने का आदेश एसपी सोनभद्र को दिया है।
हत्या के दोषी को उम्रकैद, तीन दोषमुक्त
सोनभद्र। साढ़े 16 वर्ष पूर्व हुए ललई हत्याकांड के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय सोनभद्र राहुल मिश्रा की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए दोषी गुड्डू को उम्रकैद और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं तीन महिला आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली गांव निवासी राजबहादुर पुत्र ललई प्रसाद ने 17 अप्रैल 2006 को पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को दिए लिखित प्रार्थना पत्र में अवगत कराया था कि 16 अप्रैल 2006 को शाम 4 बजे उसके पिता ललई प्रसाद को बिल्ली गजराजनगर निवासी गुड्डू, उसकी पत्नी, उसकी मां, उसका मामा व एक अन्य व्यक्ति ने लाठी, डंडे, सबल से मारा जिससे गंभीर रूप से घायल हो गए। जिससे उनकी मौत हो गई। इस तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर गुड्डू समेत पांच लोगों के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी गुड्डू को उम्रकैद और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। तीन महिला आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष की तरफ से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी विजय प्रकाश यादव ने बहस की।
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