सोनभद्र। जनपद में ऑक्सीमीटर एवं थर्मल स्कैनर की खरीद में अधिकार क्षेत्र से परे जाकर वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति देने के आरोप में एडीपीआरओ धनंजय जायसवाल के निलंबन के बाद पंचायती राज विभाग में हड़कंप मचा है। शुक्रवार को पंचायती राज विभाग से जुड़े कई कर्मचारी क्रय ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर से जुड़े कागजातों को एकत्र करने में जुटे रहे। उन्हें प्रकरण में एसआईटी जांच का भय सता रहा है।
निदेशक पंचायती राज किंजल सिंह ने एडीपीआरओ धनंजय को निलंबित कर आरोपों की जांच के लिए मंडलीय उप निदेशक प्रयागराज को जांच अधिकारी नामित किया है। उप निदेशक की रिपोर्ट में ग्राम पंचायतों में ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर की खरीद अलग-अलग दरों पर किए जाने का आरोप है। यह भी आरोप है कि राजपत्रित अधिकारी न होते हुए भी अधिकार क्षेत्र से परे जाकर तत्कालीन प्रभारी डीपीआरओ धनंजय ने ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर की खरीद के लिए वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति दे दी। रिपोर्ट में की गई संस्तुति के आधार एडीपीआरओ के पद पर तैनात तत्कालीन प्रभारी डीपीआरओ धनंजय जायसवाल को निलंबित करते हुए उन्हें निलंबन की अवधि में उप निदेशक पंचायत विंध्य मंडल मिर्जापुर कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। निलंबित हो चुके एडीपीआरओ के दबाव में आकर ग्राम प्रधानों से भुगतान कराने वालों की नींद उड़ गई है। उनको खुद के खिलाफ कार्रवाई होने का भय सताने लगा है। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को डीपीआरओ कार्यालय और कई ब्लॉकों पर ग्राम पंचायतों में क्रय किए गए ऑक्सीमीटर और स्कैनर से संबंधित पत्रावलियों को दुरुस्त किया जा रहा था ताकि कोई अधिकारी संबंधित प्रकरण से जुड़ी पत्रावलियों को मांगें तो दिखा सकें।