सोनभद्र। गर्मी शुरू होते ही जिले के राजकीय अस्पतालों में ग्लूकोज (एनएस/डीएनएस) खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। सन स्ट्रोक और उल्टी दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ने से ग्लूकोज की खपत बढ़ गई है। औसतन जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार मरीजों का इलाज होता है। अस्पताल प्रबंधन ने शासन से एक लाख ग्लूकोज की बोतल की मांग की है।
मार्च माह में गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। सन स्ट्रोक की चपेट में आने से लोग उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बदन दर्द और बुखार की चपेट में आने लगे हैं। प्रतिदिन जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर धूप से बीमार लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। ऐसे में राजकीय अस्पतालों में सन स्ट्रोक के रोगियों के लिए ग्लूकोज के बोतल पर्याप्त नहीं हैं। अगर समय रहते शासन स्तर से जिले मेें ग्लूकोज के बोतल की आपूर्ति नहीं की गई तो आने वाले दिनों में समस्या खड़ी हो सकती है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि सन स्ट्रोक की चपेट में आने से मरीजों की संख्या बढ़ गई है। शासन स्तर से एक लाख ग्लूकोज बोतल की मांग करते हुए यहां की स्थिति के बारे में भी अवगत कराया गया है। सभी सीएचसी और पीएची प्रभारियों को संक्रामक रोग से पीड़ित लोगों के लिए अलग वार्ड बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि दूसरा व्यक्ति संक्रमण की चपेट में न आ सके। कहा कि जरूरत के अनुसार ग्लूकोज खरीदकर इस्तेमाल करा रहे हैं। संभावना है कि सप्ताह भर के भीतर शासन स्तर से जिले में ग्लूकोज की आपूर्ति कर दी जाएगी।