सोनभद्र। नगर पालिका क्षेत्र में जमींदारी व्यवस्था में आने वाले हिस्से के रिकार्ड अपडेट न करना राजस्व लेखपालों को भारी पड़ गया है। मामले में पिछले 25 वर्षों से टालमटोल को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट से जवाब तलब होने के बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र में 1995 से अब तक तैनात रहे 12 लेखपालों की जिम्मेदारी तय की है। खास बात यह कि इनमें से तीन की मौत हो चुकी है, जबकि एक को पहले ही बर्खास्त कर दिया गया है। शेष आठ लेखपालों को नोटिस जारी की गई है। जिला प्रशासन ने दो माह में रिकार्ड अपडेट करने का काम तेज कर दिया है।
नगर पालिका राबर्ट्सगंज (पूर्व में ग्राम टांड के डौर) के कई हिस्से में अब तक जमींदारी प्रथा लागू है। उप्र काश्तकारी अधिनियम 1939 के प्रावधानों के तहत नॉन जेडए खसरा खतौनी लिखने का प्रावधान है। वर्ष 1995 के बाद से इस क्षेत्र में खसरा खतौनी नहीं लिखी गई है। लंबे समय से अपडेट न होने के कारण यह खसरा-खतौनी जीर्ण-शीर्ण हो गई है, जिसे अंकित आदेश को पढ़ना संभव नहीं है।
टांड के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज में खुद को जमींदार बताने वाले एक व्यक्ति ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कहा कि राबट्र्सगंज के एक हिस्से में जमींदारी विनाश कानून के प्रावधान लागू नहीं है। बावजूद जिला प्रशासन 1995 से अब तक इससे जुड़ा रिकॉर्ड मेंटेन नहीं कर रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने डीएम से अब तक खतौनी अपडेट न करने का कारण पूछा है। हाईकोर्ट के इस कदम के बाद डीएम की तरफ से स्टैंडिंग काउंसिल के जरिए कोर्ट को जानकारी दी गई कि तत्कालीन जिलाधिकारी की तरफ से 25 अगस्त 2020 को ग्राम टांड के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज के जमींदारी की खतौनी खसरा एवं अन्य अभिलेखों की पड़ताल एवं अद्यतन करने के लिए टीम गठित की गई है। कोरोना व्यस्तता के कारण नानजेड के खतौनी का लेखन कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। डीएम ने दो माह के भीतर नानजेडए खतौनी का लेखन कार्य पूर्ण करा देने की बात कही। वहीं 1995 के बाद से अब तक खसरा खतौनी के लेखन का कार्य नहीं किया गया। इस मसले पर डीएम की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि इसको लेकर की गई जांच में 1995 से अब तक कार्यरत लेखपालों की प्रथम दृष्टया शिथिलता पाई गई है। नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।
लेखन कार्य न करने के लिए माना गया जिम्मेदार
सोनभद्र। रिकार्ड अपडेट न करने के लिए 1995 से अब तक इस क्षेत्र में तैनात रहे लेखपाल प्रमोद कुमार सिंह, विक्रमादित्य (मृतक), रामकेश (मृतक), अंबा प्रसाद शुक्ला (मृतक), अवधेश कुमार तिवारी, जगदीश दुबे, रामधनी, प्रभु नारायण मिश्र (सेवानिवृत्त), सुदीप श्रीवास्तव, विष्णु चंद्र द्विवेदी (बर्खास्त), राममूरत, रत्नेश कुमार शुक्ला को प्रथम दृष्टया खतौनी.खसरा लेखन न करने के लिए जिम्मेदार माना गया है। इनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। मृतक व बर्खास्त लेखपाल को छोड़ अन्य को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
दो माह में 1995 से अब तक का रिकॉर्ड मेंटेन करने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए काम तेज कर दिया गया है। वहीं इस अवधि 1995 से अब विरुद्ध में रिकॉर्ड मेंटेन ना करने वाले लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि तीन लेखपालों की मौत हो चुकी हैं और एक बर्खास्त हो चुका है। शेष लेखपालों को नोटिस जारी की गई है। -बृजेश वर्मा, तहसीलदार राबर्ट्सगंज।