धन निकासी के लिए एटीएम के बाहर लोगों की लाइन
पुराने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट पर प्रतिबंध के बाद अब घरेलू जरूरतों पर आफत आन पड़ी है। किसी के पास घर में सब्जी लाने तक के लिए फुटकर पैसे नहीं है, तो किसान खाद-बीज के लिए परेशान हैं और एटीएम का चक्कर काट रहे हैं। एक महिला के पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। एटीएम पर धन निकासी के लिए कतार में लगे हर किसी शख्स की कोई न कोई समस्या इसी तरह की है।
केंद्र सरकार की तरफ से बड़े नोटों पर प्रतिबंध के बाद अब तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है और अफरातफरी का माहौल है। मंगलवार को एसबीआई के एटीएम पर धन निकालने के लिए लोगों की लंबी कतार लगी रही। यहां बालडीह शाहगंज से आए नागेंद्र नाथ दूबे ने बताया कि इस समय चैती फसल दलहन, तिलहन और गेहूं की खेती के लिए खाद-बीज की जरूरत है।
पांच सौ और हजार रुपये के नोट कोई दूकानदार नहीं ले रहा है। इससे खाद-बीज की खरीद नहीं हो पा रही है और खेती प्रभावित हो रही है। कहा कि वे पिछले तीन दिनों से इसी गरज से एटीएम पर आ रहे हैं लेकिन जल्द पैसा खत्म होने के नाते परेशानी हो रही है। मारकुंडी के सुशील कुमार पाठक ने बताया कि फुटकर के अभाव में घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। स्थिति यह है कि सब्जी लाने के लिए फुटकर नहीं है।
इस नाते वे एटीएम पर पैसा निकालने आए हैं। राबर्ट्सगंज नई बस्ती की सुचिता ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही हैं। केंद्र सरकार ने अस्पतालों में एक हजार और पांच सौ रुपये 24 नवंबर तक लेने का आदेश दिया है लेकिन निजी अस्पताल बड़ी नोट नहीं ले रहे हैं। अब उनके पास फुटकर नहीं है, जिसके चलते उन्हें परेशानी हो रही है। पन्नूगंज रोड की निवासी पार्वती देवी ने बताया कि वह पैसा निकालने आ रही हैं लेकिन लंबी कतार के चलते निराश होकर लौट जा रही हैं। उन्हें भी घरेलू खर्च चलाने के लिए फुटकर पैसों की जरूरत है।