नगवां ब्लाक के दर्जनों गांव में लगे विद्युत तार बच्चों के लिए झूला बन गए हैं। जमीन से काफी नीचे खीचे गए तारों को बच्चे आसानी से पकड़ लेते हैं।
15 साल पूर्व ये तार विद्युतीकरण के लिए लगाए गए थे पर अभी तक इनमें करेंट नहीं दौड़ाया गया है। विद्युत वितरण खंड राबट्र्सगंज के अधिशासी अभियंता हवलदार रावत का कहना है कि इन गांवों में दीनदयाल योजना से विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कराकर आपूर्ति कराई जाएगी।
जिले के नगवां ब्लाक के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में विद्युतीकरण कराया गया था। तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि क्षेत्र में भी बिजली मिलेगी और रात ढिबरी की रोशनी में गुजारने से निजात मिलेगी। लेकिन लोगों की मंशा धरी की धरी रह गई।
करीब 15 साल े के बाद भीअब तक लोगों को बिजली नहीं मिली है। कुछ गांवों में तार कट गए और खंभे गिर गए लेकिन विभाग के अधिकारियों ने इस पर सुधि भी नहीं ली।
बताया जा रहा है कि नगवां के अति नक्सल प्रभावित गांव करौंदिया, भदई अड़ार, दीनारी, पीडऱादोहर, पलपल, रामपुर, सोमा, केवटम, ढोसरा, सथारी, दरमा आदि गांवों में बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही।
करौदिया में तो विद्युत तार इतना नीचे है कि बच्चे पोखरे के भीटे पर से तार पकड़ लेते हैं और फिर उस पर झूला झूलते हैं। करौदिया के राजेश जायसवाल, बलिराम, देवलाल, सीताराम, रामजियावन, रामनाथ, रायसीन, बुद्धिराम आदि का कहना है कि इस ओर विद्युत विभाग के अधिकारी, कर्मचारी भी नहीं आते कि उन्हें समस्या बताई जा सके।
कहा कि अब तक उन्हें बिजली मिलने की उम्मीद ही नहीं है। उधर एक्सईएन का कहना है कि पं. दीनदयाल योजना के तहत इन गांवों में नए सिरे से विद्युतीकरण कराया जाएगा।