शक्तिनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एम-सैंड (मैन्यूफैक्चरिंग सैंड) के प्रयोग को बढ़ाने पर जोर दिया है। सीएम के इस रुख से एनसीएल की मुहिम को बल मिला है। एनसीएल ने पिछले साल से एम-सैंड का उत्पादन शुरू किया है। प्राकृतिक रेत से यह किफायती है। फिलहाल एनसीएल प्रतिदिन 1000 क्यूबिक मीटर एम-सैंड का उत्पादन कर रहा है। मांग के मुताबिक उत्पादन क्षमता में वृद्धि की भी तैयारी है।
देश की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी एनसीएल कोयले के साथ अब विनिर्मित रेत (एम-सैंड) को खुले बाजार में बेच रहा है। इसकी बिक्री की प्रक्रिया को पहले के मुताबिक सरल बनाए जाने से कोई भी जरूरतमंद मशीन से बनाई गई रेत (एम-सैंड) को खरीद सकता है। कोयला निकासी के निमित्त खदानों से उत्पन्न अधिभार (ओवर बर्डन) का निस्तारण एनसीएल के लिए बड़ी समस्या है। इसी अधिभार से एम-सैंड बनाने के लिए एनसीएल ने अमलोरी कोयला क्षेत्र में प्लांट स्थापित किया है। शुरू में संयंत्र से उत्पादित रेत को ई नीलामी के जरिए बेचे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके चलते छोटे जरूरतमंद रेत के उठान से वंचित थे। इस समस्या को देखते रेत को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए एनसीएल ने विक्रय नियमों का सरलीकरण कर दिया। अब एम-सैंड का ई-ऑक्शन की जगह सीधी बिक्री शुरू कर दी है। इसके तहत बड़ी आसानी से कोई भी उपभोक्ता व ग्राहक अपने जरूरत के अनुसार एनसीएल की एम-सैंड को सीधे खरीद सकता है। योजना का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम 50 क्यूबिक मीटर एम-सैंड खरीदना अनिवार्य है। यह योजना फिलहाल प्रभाव में है। उपभोक्ता विनिर्मित रेत के लिए एनसीएल के खाते में पैसा जमा करा पावती लेकर रेत उठा सकता है।
कोट
मशीन से बनाई गई रेत को प्राकृतिक बालू के बाजार दर से काफी किफायती है एम-सैंड मात्र 645 रुपया 75 पैसा प्रति क्यूबिक मीटर है। इस दर में सभी प्रकार के कर और राजस्व सम्मिलित हैं।
राम विजय सिंह, प्रवक्ता,एनसीएल
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बालू और मोरम से बेहतर एम सैंड
खनन विभाग के कार्यों का समीक्षा करते हुए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एम- सैंड को प्राकृतिक बालू/मोरम का बेहतर विकल्प बताते हुए शीघ्र नीति घोषित करने की बात कही। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार अतिशीघ्र एम-सैंड नीति लागू कर सकती है। इससे प्राकृतिक रेत/मोरम के एक नए विकल्प की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
गुणवत्ता को सीएमडी ने प्रमाणिक बताया
शक्तिनगर। नई नीति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि एम-सैंड के गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें जीवन और संपत्ति की सुरक्षा शामिल है। एनसीएल सीएमडी बी साईराम के मुताबिक एम-सैंड को मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी प्रयागराज, आईआईटी खड़गपुर व बीएचयू ने जांच के बाद गुणवत्ता पूर्ण माना है।