चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी शनिवार को नवरात्र का शुभारंभ होगा। पहले दिन देवी के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होगी। इसके लिए देवी मंदिरों को सजाने के साथ ही, श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
मां कुंडवासिनी, मां ज्वालामुखी, मां वैष्णो और मां अमिला धाम में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए यहां शुक्रवार शाम से ही पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई।
एएसपी शंभूशरण यादव ने बताया कि डाला में एक सशस्त्र गारद के साथ ही दस पुलिसकर्मी, एक दरोगा और दो महिला कांस्टेबलों की तैनाती की गई है।
इसी तरह शािक्तनगर स्थित मां ज्वालामुखी, कुंडारी स्थित मां कुंडवासिनी, कोन क्षेत्र स्थित मां अमिला में भी सशस्त्र गारद सहित अन्य प्रबंध किए गए हैं।
उधर, देवी आराधना के महापर्व को देखते हुए प्रमुख मंदिरों के साथ राबर्ट्सगंज मेन चौक स्थित शीतला माता मंदिर, दंडइत बाबा मंदिर परिसर स्थित काली मां मंदिर, दुद्धी स्थित मां काली मंदिर, चोपन स्थित मां काली मंदिर, ओबरा स्थित मां शारदा शक्तिपीठ, अनपरा परिक्षेत्र के डिबुलगंज स्थित दुर्गा मंदिर,
अनपरा बाजार स्थित दुर्गा मंदिर, बीना स्थित दुर्गा मंदिर में रंगरोगन के साथ आकर्षण सजावट की गई है। पुरोहित महेश मिश्र के मुताबिक अबकी बार नवरात्र आठ दिन का ही है।
पहले दिन कलश स्थापना के साथ दुर्गा सप्तशती के पाठ एवं विशेष अनुष्ठान की शुरुआत की जाएगी। नवमी तिथि को कुंवारी कन्याओं एवं ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का पारण किया जताएगा।
वहीं शक्तिनगर में अनुष्ठान पुरोहित दुर्गा प्रसाद मिश्र ने बताया कि ज्वालामुखी मंदिर में शनिवार की भोर में चार बजे विषिष्ट पूजन एवं देवी शृृंगार के बाद पट खोल दिए जाएंगे।
इस दौरान दुर्गासप्तशती के पाठ के साथ ही कई धार्मिक अनुष्ठान कराए जाएंगे। बताते चलें कि जनपद में मां कुंडवासिनी और मां ज्वालामुखी देवी शक्तिपीठ है।
कहते हैं कि दक्ष के यज्ञ विध्वंश के समय भगवान शिव मां सती का शव लेकर आसमान में विचरण कर रहे थे। तब भगवान विष्णु ने शोक कम करने के लिए सुदर्शन चक्र से शव के कई टुकड़े कर दिए। इसमें कटि भाग कुंडवासिनी में और जिह्वा शक्तिनगर में गिरा था। तभी से इसे शक्तिपीठ की मान्यता प्राप्त है।