नाबार्ड का जिले में मात्र एक प्रतिनिधि जिला विकास प्रबंधक होता है। इनकी निगरानी में ही संस्थाएं काम करती हैं और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। जबतक गांव आत्मनिर्भर नहीं बनेंगे तबतक विकास संभव नहीं है। ये बातें राष्ट्रीय ग्रामीण विकास बैंक के उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक दुष्यंत सिंह चौहान ने शनिवार की शाम पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
उन्होंने कहा कि साढ़े तीन सौ जिलों में नाबार्ड के प्रतिनिधि के रूप में जिला विकास प्रबंधक रखे गए हैं। इनके अलावा नाबार्ड का कोई भी कार्यकर्ता नहीं होता है। राज्य सरकार को भी नाबार्ड की ओर से वित्तीय सहायता की जाती है। कहा इसके एवज में 2.75 प्रतिशत ब्याज लिया जाता है। कहा कि कोरोना काल में एक बड़ी धनराशि रिजर्व बैंक को दी गई थी। उन्होंने कहा कि नाबार्ड की ओर से गैर सरकारी संगठनों के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के कार्य किए जाते हैं। इन विकास कार्यों में महिलाओं के साथ ही पुरुषों को भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जाता है। कहा कि यह कार्य जिला विकास प्रबंधक की ओर से किया जाता है। जिला विकास प्रबंधक की निगरानी में ही संस्थाएं काम करती हैं और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हर संभव प्रयत्न किए जाते हैं। कहा कि करीब 25 वर्ष पूर्व वह भी जिला विकास प्रबंधक के तौर पर कार्य कर चुके हैं। कहा कि गांव को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। कहा जब तक गांव आत्मनिर्भर नहीं बनेंगे तब तक विकास संभव नहीं है। उन्होंने इसके लिए अब तक सोनभद्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस मौके पर जिला विकास प्रबंधक पंकज सिंह समेत विभिन्न संस्थानों के लोग मौजूद रहे।