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कर्मनाशा में डूबकी लगाकर तोड़ा मिथक

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नगवां ब्लॉक क्षेत्र के कर्मनाशा नदी के तट पर पुजन करते निलेश उपाध्याय - फोटो : SONBHADRA
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कर्मनाशा में स्नान से पुण्य कर्मों के नाश का मिथक तोड़ने के लिए मकर संक्रांति पर शुक्रवार को कर्मनाशा में डुबकी लगाई गई। नल दमयंती घाट पर कवि व लेखक निलय उपाध्याय, विजय शंकर समेत कई लोगों ने स्नान कर कर्मनाशा के शापित होने का मिथक तोड़ा। नदी के तट पर ही वैदिक मंत्रोच्चार भी किया।
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मुख्य अतिथि निलय उपाध्याय ने कहा कि जो नदी जीवनदायिनी है उसे शापित कहा ही नहीं जा सकता। किसी भी पुराण में इस मिथक से संबंधित कोई भी उल्लेख नहीं है, यह सिर्फ एक मिथक है। यथार्थ नहीं बदलता, समय और भाषा बदलती है। आज हम सब हजारों साल की विडंबना को छोड़ कर नए यथार्थ की भूमि पर खड़े हैं। अब इस यज्ञ के बाद कर्मनाशा शापित नहीं रही। विजय शंकर चतुर्वेदी ने कहा कि लोककथाओं व जन श्रुतियों के आधार पर किसी जलधारा को अभिशप्त नहीं किया जा सकता। विजय विनीत ने कहा कि चंदौली जिले में कर्मनाशा पर औरवाटांड़ बांध, मूसाखाड़ और लतीफशाह बांध उस जिले की हरीतिमा का मुख्य आधार है। कार्यक्रम में सनोज तिवारी, राजू चौबे, पूर्व क्षेत्र प्रमुख प्रवीण सिंह, सुमित शाह, श्यामसुंदर पांडेय, विनय पांडेय, बसंत कुमार सिंह, बमबम सिंह, परमा गुप्ता, वीरेंद्र दुबे, रामसूरत गुप्ता, अवधेश पटेल, सुनील सिंह, राजेश सोनी, शिव नारायन आदि रहे।
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