याचिकाकर्ता ने बताया कि वर्ष 2010 में उन्होंने हिंडाल्को के चिकित्सक डॉ. अडूकिया से संक्रमणीय भूमिधर होने के नाते भूमि खरीदी थी। भूमि के दाखिल खारिज के दौरान आपत्ति लग जाने की वजह से आठ वर्ष तक मुकदमा चला। वर्ष 2018 में उनके पक्ष में दाखिल खारिज करने का आदेश हुआ। आदेश के बाद मालिकान भी हो गया लेकिन वह आदेश खतौनी में दर्ज नहीं हो सका।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से उनकी भूमि को जंगल रखात में दर्ज कर दिया गया। कहा कि करीब तीन बीघा भूमि हवाईअड्डे के दायरे में जाने के बाद उन्हें मुआवजे के तौर पर कुछ न मिलने और खतौनी से नाम हटाने पर हाईकोर्ट जाना पड़ा। हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मौके पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। मुकदमे में अगली तारीख 20 सितंबर को है।
तहसीलदार (दुद्धी) सुरेश चंद्र शुक्ला ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर हवाईअड्डे का कार्य फिलहाल रोका गया है। उच्चाधिकारियों से निर्देश लेकर विवादग्रस्त भूमि को छोड़कर अन्य दूसरे भाग में निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। सोनभद्र जिला मुख्यालय से करीब 100 किमी दूर म्योरपुर है। सब कुछ ठीक रहा तो एक से दो माह के अंदर उड़ान सेवा शुरू हो सकती है। म्योरपुर एयरपोर्ट के शुरू होने से वाराणसी को मिला कर दो हवाई अड्डे केवल पूर्वांचल में हो जाएंगे।