सूबे के औद्योगिक हब का दर्जा पाए ओबरा-अनपरा अंचल (भाठ) क्षेत्र में पानी का संकट गहराने लगा है। अधिकांश हैंडपंपों के जवाब देने से पेयजल के मारामारी मचने लगी है। ओबरा अनपरा के बीच 40 से 60 किमी एरिया में आदिवासियों की बड़ी तादाद निवास करती है।
औद्योगिक परियोजनाओं से क्षेत्र घिरा होने के बावजूद यहां के मूल बाशिंदों को हर साल पानी संकट से दो-चार होना पड़ता है। इस बार अवर्षण की स्थिति के चलते फरवरी माह आते-आते अधिकांश हैंडपंप जवाब दे चुके हैं। रिहंद डैम से सटे होने तथा बेलवाजदह, पिपरी सोनवानी में आरओ प्लांट लगे होने के बावजूद जहां पानी के लिए मारामारी की स्थिति बनने लगी है।
वहीं क्षेत्रफल के मामले में प्रदेश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत के डिबुलगंज बस्ती को छोड़कर हर टोले में बूंद-बूंद पानी के लिए जंग शुरू हो गई है।
इसके चलते बीरनबहरा, लोझरा, रणहोर, मिर्चाधुरी, बडऱवा, इनिया, टूरीपान, सिदहवां, बेनादह, बैरिहवां, खजुरा, मोलाइन स्रोत, बियहवां, हरीपुर, हाथीसोंड़, खोड़िया में हजारों की आबादी पानी के लिए सुबह-शाम दौड़ लगाने के लिए विवश हो गई हैं।
इस एरिया में स्थित पहाड़ी नदी-नालों के सूखने से मवेशियों के साथ ही वन्य जीवों के लिए भी पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। कुलडोमरी जिला पंचायत सदस्य बालकेश्वर सिंह, बेलवादह प्रधान हरदेव सिंह, कुलडोमरी प्रधान प्रतिनिधि समयलाल खरवार, योगेंद्रा प्रधान मोहरलाल कहते है कि संबंधितों को लगातार हालात से अवगत कराया जा रहा है,
लेकिन अब तक उनकी एरिया में टैंकर चलाए जाने की जरूरत नहीं समझी जा चुकी है। इसके चलते लोग पानी के लिए एक से दो किमी दूर स्थित चुआड़ एवं दह (नालों के गहरे भाग में जमा पानी) के लिए दौड़ लगाने लगे हैं।
हरदेव बताते हैं कि उनका गांव रिहंद तट से सटा हुआ है लेकिन उनके यहां का जलस्तर इतना नीचे चला गया कि डेढ़ सौ फीट पाइप बोरमें डालने के बाद भी पानी नहीं निकल पा रहा है।