मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने और एहतियात बरतना शुरू कर दिया है। अब प्रसव के 48 घंटे बाद ही जच्चा-बच्चा को अस्पताल से रिलीव किया जा सकेगा। इससे कम अवधि में प्रसूता को छोड़ने वाले डाक्टरों को लापरवाह मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिले में 184 स्वास्थ्य उपकेंद्र, छह प्राथमिक एवं दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा राबर्ट्सगंज जिला अस्पताल में स्थित प्रसवोत्तर केंद्र व संयुक्त चिकित्सालय अनपरा में प्रसव कराया जाता है। प्रसव के दो-तीन घंटे बाद ही अधिकांश जच्चा-बच्चा अपने घर चले जाते हैं। जबकि शिशु और प्रसूता के स्वास्थ्य की देखरेख उसके बाद भी करना जरूरी होता है। अब विभाग ने नियम बना दिया है कि प्रसव 48 घंटे बाद ही जच्चा-बच्चा को अस्पताल से छुट्टी दी जा सकेगी। हालांकि इसमें मुश्किल बहुत है क्योंकि तमाम प्रसूता अस्पतालों में उचित इंतजाम न होने के कारण रुकना ही नहीं चाहती हैं। जिले के चिकित्सा केंद्रों में शुद्ध पेयजल, भोजन और शौचालयों की बेहतर व्यवस्था ही नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ठीक से ध्यान न देने के कारण जन्म लेने वाले 1000 बच्चों में से 60 बच्चों की मौत हो जाती है। वहीं एक लाख प्रसूताओं में से करीब 220 की मौत हो जाती है। मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सीएमओ डा. यूके वर्मा ने संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों को प्रसव के 48 घंटे तक स्वास्थ्य केंद्र पर रखने और उसके बाद एंबुलेंस से जच्चा-बच्चा को घर तक पहुंचाने का निर्देश दिया है।
अस्पतालों में प्रसूताओं को मुफ्त भोजन, दवा आदि उपलब्ध कराने कहा है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय के पहले जो जच्चा-बच्चा को छूट्टी देने पर जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिला अस्पताल में दो दिन पूर्व सीएमएस डा. गणेश प्रसाद ने मातहतों के साथ मीटिंग कर 48 घंटे बाद ही जच्चा-बच्चा को छूट्टी देने का निर्देश दिया है।