जयंत परियोजना के विस्तार के लिए मोरवा में 927 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। करीब 30 हजार परिवारों को विस्थापित किया जाएगा। यह कोल इंडिया का सबसे बड़ा विस्थापन है। इसी के अनुरूप तय मानकों के तहत प्रभावित परिवारों के बेहतर पुनर्वास की भी व्यवस्था की जाएगी। -रामविजय सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, एनसीएल।
जिस भूमि का अधिग्रहण होना है, उस पर एनसीएल का मुख्यालय, आवास और सिंगरौली नगर निगम के 11 वार्ड और मुख्य बाजार भी हैं। इस विस्थापन के बाद सिंगरौली शहर एक तिहाई ही रह जाएगा। विस्थापन और अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया के लिए अभी कोई डेडलाइन तय नहीं है, लेकिन इसमें करीब डेढ़ से दो साल लगने का अनुमान है। जयंत परियोजना से कोल उत्पादन करीब 30 मिलियन टन प्रति वर्ष है। इसे अगले तीन साल में 35 मिलियन टन करने का लक्ष्य है।
सिंगरौली नगर निगम में तीन जोन हैं। इनमें से सबसे पुराना जोन मोरवा है। मोरवा में कुल 11 वार्ड हैं, जिनकी आबादी करीब एक लाख से अधिक है। सिंगरौली रेलवे स्टेशन, एनसीएल का मुख्यालय सहित पुरानी बसावट मोरवा में ही है। दूसरा जोन बैढ़न है, जहां सिंगरौली का जिला मुख्यालय है। कलेक्ट्रेट, एसपी कार्यालय सहित अन्य सभी सरकारी भवन बैढ़न में हैं। तीसरा जोन विंध्यनगर है। यह जोन एनटीपीसी की विंध्याचल परियाेजना के आसपास बसा है। इनमें मोरवा इसलिए महत्वपूर्ण है कि पुराना सिंगरौली शहर यहीं है।