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प्रदूषण के विरोध में 18 गांवों में नहीं मनी दिवाली

Tue, 01 Nov 2016 10:57 PM IST
सोनभद्र
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ऊर्जांचल में प्रदूषण नियंत्रण की कागजी कवायद देख अब ग्रामीण खुद संघर्ष के लिए कदम आगे बढ़ाने लगे हैं। रविवार की रात जहां हर ओर दीपकों की जगमगाहट थी। उस समय म्योरपुर, बभनी, चोपन और दुद्धी के 18 गांवों में ग्रामीणों ने दिवाली नहीं मनाई। महज एक-एक दीपक जलाकर प्रदूषण के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का संकल्प जताया। इसके अलावा  25 गांवों  के सात सौ ग्रामीण भी इस मुहिम के हिस्सा बने और उन्होंने भी संघर्ष की राह अपनाने की हुंकार भरी।
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अगुवाई कर रहे सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संरक्षक एवं बनवासी सेवा आश्रम संचालक मंडल के सदस्य अजय शेखर, संयोजक एवं पिपरहवा निवासी रामेश्वर प्रसाद, सहसंयोजक एवं बभनी निवासी रामनारायण ने कहा कि एनजीटी के आदेश के बावजूद प्रदूषण की प्रभावी रोकथाम नहीं हो पा रहा है। खेत उसर हो रहे हैं। लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते जा रहे हैं। फलों, फसलों का उत्पादन घटा है। जंगल का दायरा घट रहा है।


बावजूद जिम्मेदार सिर्फ कागजी कोरम तक ही सिमटे हुए हैं। वहीं गांवों से अभियान की अगुवाई करने वाले फरीपान के रामचंद्र सिंह, रनटोला के दिनेश जायसवाल, पिपरहवा के रामेश्वर, मनबसा के रामचंद्र, जुगैल के रामऔतार, किरवानी के शिवप्रसाद, विजय, बुधिनारायण, पड़वा कोदवारी के हरि प्रसाद, विश्रामपुर के रामलखन, गोविंदपुर के शिवलोचन, मिटिहनी के रमेश, देवनारायण ने बताया कि उनके गांवों के साथ ही शीशटोला, सलईबनवा, गुलालीडीह, डइनिया, बोड़रा, डगडउआ बस्ती, जूरा में दिवाली नहीं मनाई गई। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से एक दीप जलाकर संघर्ष का संकल्प लिया।
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इसी तरह रणहोर, बीरनबहरा, गड़िया सहित 25 गांवों के सात सौ अधिक ग्रामीणों ने भी दीवाली नहीं मनाई। बताया कि छठ बाद बैठक कर बड़े आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी।
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