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UP: लौह अयस्क के नए ब्लॉक से एमपी सीमा तक बढ़ेगा खनन का दायरा, दो बड़ी खदानों का किया जा चुका है टेंडर

Fri, 03 Apr 2026 02:14 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

Sonbhadra News: जुगैल (चोपन) और कोन में लगातार सर्वे जारी है। लौह अयस्क की एरिया में और बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों ब्लाॅकों के उच्च प्रीमियम दर को देखते हुए गैंलेंट इस्पात गोरखपुर के पक्ष में माइनिंग लीज का आवंटन किया गया था। अब भरहरी यानी ब्लाॅक बी से सटे जुगैल क्षेत्र के ब्लाॅक डी एरिया में लौह अयस्क का बड़ा भंडार पाया गया है।
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लौह अयस्क के नए ब्लॉक से एमपी सीमा तक बढ़ेगा खनन का दायरा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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औद्योगिक विकास से अछूते जुगैल (चोपन) और कोन अंचल जल्द ही लौह अयस्क के मामले में बड़ी पहचान बनाते नजर आएंगे। यहां पाए गए लौह अयस्क के भंडार के आधार पर जहां दो बड़ी खदानों के टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। वहीं अब जुगैल एरिया में लौह अयस्क का नया ब्लॉक मिलने से इस अंचल के विकास की नई संभावनाओं को बल मिला है। 

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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) का सर्वे इस क्षेत्र में लगातार जारी है। आगे चलकर दो और ब्लॉक मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बताते चलें कि पिछले साल लौह अयस्क से जुड़े ब्लाॅक बी-भरहरी (चोपन ब्लाॅक) और ब्लाॅक सी- सोमा चकरिया (कोन) के ई-ऑक्शन (एनआईटी) की प्रक्रिया अपनाई गई थी। 

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ब्लॉक चिह्नित होने की उम्मीद

जीएसआई की टीम ने खनन निदेशक माला श्रीवास्तव को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके मुताबिक तीन मिलियन टन अधिक लौह अयस्क भंडार ब्लॉक डी में मौजूद है। सूत्रों की मानें तो दो और ब्लॉक चिह्नित किए गए हैं। जिसकी तलाश के लिए लगातार प्रयास जारी है। बता दें कि जिस जुगैल अंचल में अब तक लौह अयस्क के दो भंडार पाए जा चुके हैं और उससे सटे क्षेत्र में दो और ब्लॉक चिह्नित होने की उम्मीद जताई जा रही है। 

वह पूरा क्षेत्र जहां वर्षों तक पिछड़ेपन का शिकार रहा है, वहीं इससे सटा मध्यप्रदेश का इलाका भी सामान्य इलाकों के मुकाबले काफी पिछड़ा हुआ है। लौह अयस्क का भंडार मिलने के बाद जहां यूपी-एमपी दोनों राज्यों के बड़े इलाके में रोजगार की संभावनाएं बढ़ गई हैं। वहीं विकास के मामले में भी यह इलाका आगे चलकर कई इलाकों को मात देता नजर आ सकता है।
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बन सकता है कोयला-लौह अयस्क का नया कॉरिडोर
जुगैल एरिया के जिस क्षेत्र में लौह अयस्क के भंडार मिले हैं। वहां से महज 40 से 45 किमी की दूरी पर एनसीएल की कोल खदानें संचालित हैं। वहीं इस एरिया से सटे एमपी के सरई इलाके में वर्ष 2015-16 में ही कोयले के 10 ब्लाॅक चिह्नित किए जा चुके हैं। एक तरफ लोहा और दूसरी तरफ कोयले के बड़े भंडार को देखते हुए जहां कोयला और लौह अयस्क का एक नया काॅरिडोर बनने की संभावनाएं बनने लगी हैं।
वर्जन
जीएसआई की टीम ने अपनी रिपोर्ट सीधे निदेशालय को सौंपी है। निदेशालय से मिले निर्देश के आधार पर स्थानीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जुगैल क्षेत्र में पहले भी लौह अयस्क के ब्लॉक मिले थे। क्रमवार इसी क्षेत्र में सर्वे आगे बढ़ रहा है। - अनुज कुमार, भू वैज्ञानिक/क्षेत्रीय अधिकारी।
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