जीएसआई की टीम ने खनन निदेशक माला श्रीवास्तव को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके मुताबिक तीन मिलियन टन अधिक लौह अयस्क भंडार ब्लॉक डी में मौजूद है। सूत्रों की मानें तो दो और ब्लॉक चिह्नित किए गए हैं। जिसकी तलाश के लिए लगातार प्रयास जारी है। बता दें कि जिस जुगैल अंचल में अब तक लौह अयस्क के दो भंडार पाए जा चुके हैं और उससे सटे क्षेत्र में दो और ब्लॉक चिह्नित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
वह पूरा क्षेत्र जहां वर्षों तक पिछड़ेपन का शिकार रहा है, वहीं इससे सटा मध्यप्रदेश का इलाका भी सामान्य इलाकों के मुकाबले काफी पिछड़ा हुआ है। लौह अयस्क का भंडार मिलने के बाद जहां यूपी-एमपी दोनों राज्यों के बड़े इलाके में रोजगार की संभावनाएं बढ़ गई हैं। वहीं विकास के मामले में भी यह इलाका आगे चलकर कई इलाकों को मात देता नजर आ सकता है।
बन सकता है कोयला-लौह अयस्क का नया कॉरिडोर
जुगैल एरिया के जिस क्षेत्र में लौह अयस्क के भंडार मिले हैं। वहां से महज 40 से 45 किमी की दूरी पर एनसीएल की कोल खदानें संचालित हैं। वहीं इस एरिया से सटे एमपी के सरई इलाके में वर्ष 2015-16 में ही कोयले के 10 ब्लाॅक चिह्नित किए जा चुके हैं। एक तरफ लोहा और दूसरी तरफ कोयले के बड़े भंडार को देखते हुए जहां कोयला और लौह अयस्क का एक नया काॅरिडोर बनने की संभावनाएं बनने लगी हैं।
वर्जन
जीएसआई की टीम ने अपनी रिपोर्ट सीधे निदेशालय को सौंपी है। निदेशालय से मिले निर्देश के आधार पर स्थानीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जुगैल क्षेत्र में पहले भी लौह अयस्क के ब्लॉक मिले थे। क्रमवार इसी क्षेत्र में सर्वे आगे बढ़ रहा है। - अनुज कुमार, भू वैज्ञानिक/क्षेत्रीय अधिकारी।