ओबरा थाना क्षेत्र के रासपहरी में विस्फोट से आठ श्रमिकों की मौत के मामले में शनिवार को विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सदर तहसील पर धरना दिया और प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने घटना के लिए जिम्मेदारों पर मुकदमा दर्ज कराने और घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की। मृतकों के परिवार वालों को दस-दस लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की गई।
तहसील पर धरना में पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज, भाकपा माले, भारतीय सामाजिक न्याय मोर्चा और दलित महासभा ने हिस्सा लिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि जिले में मानक के विपरीत अवैध खनन हो रहा है। जिससे राजस्व विभाग को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। पर्यावरण को भारी क्षति पहुंच रही है। जिला प्रशासन पर खनन माफियाओं से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए वक्ताओं ने कहा कि जिला प्रशासन आम लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इसके पहले भी वर्ष 2012 में खनन मजदूरों की मौत हो चुकी है। पीयूसीएल के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि प्रत्येक मृतक के परिवार को दस लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी दी जाए। यदि मांग पूरी नहीं हुई तो अनिश्चित कालीन धरना चलाने का निर्णय लिया जाएगा। विकास शाक्य, सुधाकर यादव, चौधरी यशवंत सिंह, जेपी भारती, नेहा मौर्य, मोहम्मद कलीम, डा. ईश्वर दयाल, फतेह मोहम्मद, रामकृष्ण पाठक, दीपक भारती मौजूद रहीं।