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Sonebhadra News: गीत, गजलों से गौरैया के संरक्षण का संदेश

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सोनभद्र। गौरैया दिवस की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को रॉबर्ट्सगंज नगर स्थित अधिवक्ता आशीष पाठक के आवास पर कवि गोष्ठी आयोजित हुई। उत्सव ट्रस्ट की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में कवियों ने गीत, गजलों एवं रचनाओं से गौरैया के संरक्षण पर जोर दिया। गौरैया के साथ विलुप्त होती प्रजातियों को बचाने का संकल्प लिया गया।कवि सुधाकर पांडेय ने - वाणी वंदना वर दे शारदे मां वर दे... से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ट्रस्ट के संरक्षक सिद्धनाथ पांडेय ने - भोली गौरैया तू छोड़ अंगनईया के कहां जाई गईलू लुकाई हो चिरईया... सुनाई। मिमिक्री आर्टिस्ट उत्सव ट्रस्ट के संरक्षक अभय कुमार शर्मा ने - गौरैया बचाने का शुभ काम हो रहा है उत्सव ये कोशिशों का सुबहो शाम हो रहा है... सुनाया। अशोक तिवारी ने - फिरकापरस्ती परिंदे नहीं करते, हम आदमी होकर भी क्या-क्या नहीं करते... तो अब्दुल हई ने परिंदे अब मुंडेरों पर आया नहीं करते... सुनाया। दयानंद दयालू ने - उजड़ल जाता उजड़ल गऊवां बसवार हो... सुनाया। दिलीप सिंह दीपक ने - छोटी सी प्यारी सी चिड़िया हूं मैं बचा लो बचा लो गौरैया हूं मैं... सुनाया। धर्मेश चौहान ने - कहां गई गौरैया, फिर से आओ मेरे द्वार..., कौशल्या चौहान ने - मुझको मेरी चिड़िया रानी लगती बेहद प्यारी हैं..., प्रभात सिंह चंदेल ने मनभावन सोन चिराईया हूं मैं नन्ही गौरईया हूं... सुनाया। गोपाल कुशवाहा ने - आग पानी में लगाते हैं लगाने वाले, चैन से यार रहेंगे न जमाने वाले..., अलका केसरी ने - मैं नन्ही गौरैया हमको जीने का अधिकार दो... सुनाया। राधेश्याम पाल ने - आंगन की मेरे किलकारी, कहां गई गौरैया प्यारी... सुनाया। अध्यक्षता रामनाथ शिवेंद्र व संचालन शहीद स्थल करारी के प्रबंधक प्रद्युम्न तिवारी ने किया। डॉ. प्रकाश पाठक, स्वामी अरविंद सिंह, संतोष कुमार सिंह, डॉ. चंद्रभूषण देव पांडेय, देवेंद्र कुमार त्रिपाठी आदि रहे।
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पांच हजार से अधिक बांट चुके हैं घोसले
उत्सव ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं अधिवक्ता आशीष पाठक गौरैया के संरक्षण के लिए बढ़चढ़ कर काम कर रहे हैं। खुद से घोषला बनाना और फिर वितरित करने का काम करते हैं। जनपद सोनभद्र के साथ ही वाराणसी, लखनऊ, गोंडा, प्रयागराज, बाराबंकी व दिल्ली में अब तक लगभग पांच हजार स्वनिर्मित घोसले लगाए जा चुके हैं।
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