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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आदिवासियों को आरक्षण के लिए सौंपा ज्ञापन

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म्योरपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की मांग को लेकर ओबरा विधायक की अगुवाई में जनजातियों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को लखनऊ में जनजाति आयोग और चुनाव आयोग पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। भाजपा अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधिमंडल ने जनपद की कुल आबादी का 20.67 फीसदी आदिवासी होने के हिसाब से आरक्षण की मांग की है।
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आयोग को दिए ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जनपद सोनभद्र प्रदेश का सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाला जिला है जहां आदिवासियों की कुल जनसंख्या 3,85,018 है जो जिले की कुल संख्या 18,62,559 का 20.6 फीसदी है। पूर्ववर्ती सरकार वर्ष 2015 में गलत ढंग से प्रधान और सदस्यों का आरक्षण निर्धारित कर दी जिसके कारण जिले में मात्र 28 पद प्रधान के लिए जनजातियों के लिए आरक्षित हुए जबकि जनसंख्या के आधार पर कुल ग्राम पंचायतों 637 का 20.67 फीसदी 131 ग्राम पंचायतें होती हैं। पूर्व की सरकार की गलत आरक्षण नीति से जिला महाराजगंज में .60 फीसदी जनजातियों के लिए 11 ग्राम पंचायतें, सिद्धार्थनगर में .46 फीसदी जनजातियों के लिए 11 ग्राम पंचायतें, कुशीनगर में 2.30 फीसदी जनजातियों के लिए 40 ग्राम पंचायतें आरक्षित कर दी गई, जिनमें क्रमश 3, 11 एवं 17 ग्राम पंचायतें पूरे पांच वर्ष तक रिक्त रह गई। सर्वाधिक जनजाति जनसंख्या वाले जिला सोनभद्र में जनजातियों को उचित आरक्षण सुविधा न मिलने के कारण बाहरी व्यक्तियों को ग्राम प्रधान बनने का अवसर उपलब्ध होता है। इसके कारण बाहरी जनप्रतिनिधि बनकर आदिवासियों का शोषण करते हैं।
2019 में जुलाई माह में ग्राम पंचायत मूर्तियां का उम्भा नरसंहार कांड इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सरकार के सांख्यिकी आंकड़ा प्रपत्र वर्ष 2011 एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश सामान्य निर्वाचन 2015 व उसके बाद हुए उपचुनाव के बाद भी 31 ग्राम पंचायतों का प्रधान विहीन रहना या आवश्यकता बताने के लिए पर्याप्त है कि अनुसूचित जनजातियों को उनका अधिकाधिक प्रतिनिधित्व सर्वाधिक जनसंख्या बाहुल्य जिला सोनभद्र में दिया जाना जरूरी है। प्रतिनिधि मंडल में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष रामदुलार सिंह गौड़, जगदेव गौड़, रामदास गौड़ समेत बड़ी संख्या में जनजाति समुदाय के लोग मौजूद रहे।
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