ऊर्जांचल के पहाड़ी व वन क्षेत्र में आग तेजी से फैल रही है। इस कारण जंगलों में लगे छोटे-छोटे औषधीय पौधे जलकर नष्ट हो रहे हैं और बड़े पेड़ भी आग से झुलस रहे हैं। वन्यजीवों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है।
सर्दी के बाद पतझड़ के मौसम के कारण पेड़ों के पत्ते सूखकर जंगलों में बिखरे पड़े हैं। इस महुआ के फल भी तैयार हो गए हैं। ग्रामीण महुआ बिनने के चक्कर में सूखे पत्तों में आग लगा दे रहे हैं।
तेज हवाओं और सूखे पत्तों के कारण आग जंगलों में फैल गई है, जिससे जंगलों में लगे छोटे-छोटे औषधीय पौधे जलकर नष्ट हो रहे हैं। आग से जंगलों में लगे कीमती पेड़ भी झुलस रहे हैं।
बढ़ती आग से किसानों के तैयार गेहूं के फसलों, घरों एवं झोपड़ियों में आग लगने का खतरा बना हुआ है। गत दिनों जंगलों में लगी आग कुलडोमरी ग्राम पंचायत के प्रधान के घर तक पहुंच गई थी। आग बुझाने के चक्कर में प्रधानपति आग में बुरी तरह झुलस गए थे।