मऊकला गांव स्थित गौतम बुद्ध विहार पर रविवार को मऊ महोत्सव का आयोजन किया गया। पंचशील व राष्ट्रीय ध्वज का ध्वजारोहण कर महोत्सव का शुभारंभ हुआ। मेले में भारी संख्या में लोगों की भीड़ रही। इस दौरान बुद्ध के संदेशों के आलोक में भारतीय संविधान की व्याख्या विषय पर चर्चा की गई।
मऊकला में करीब100 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित महात्मा बुद्घ की विशालकाय मृर्ति देखने के लिए लोग पहुंचे। कार्यक्रम में श्रद्घालुओं ने भंते महेंद्र से बौद्घ धम्मं की दीक्षा ग्रहण की। इस मौके पर हुई गोष्ठी में मुख्य अतिथि अंतर्राष्ट्रीय बौद्घ शोध संस्थान लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष भंते नंद रत्न ने कहा कि भगवान बुद्घ के समता, स्वतंत्रता, न्याय, बंधुत्व के आधार पर भारतीय संविधान की रचना की गई है। उनके उपदेश एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। मुख्य वक्ता पूर्व मंत्री राकेश कुमार ने कहा कि समाज में व्याप्त छूूआछूत, अंध विश्वास, पाखंड, नक्सलवाद, आतंकवाद, व भ्रष्टाचार को भगवान बुद्घ के देशना पर लागू भारतीय संविधान को इमानदारी से लागू कर पालन करके ही किया जा सकता है। अध्यक्षता कर रहे राजाराम ने कहा कि भगवान बुद्घ के वाणी दर्शन का सभ्य समाज के निर्माण में बहुत ही गंभीर और महत्वपूूर्ण स्थान रहा है। संयोजक सुमंत सिंह मौर्य ने समाज को नशाखोरी से मुक्त कर सभ्य समाज के निर्माण पर जोर दिया। संचालन दयाशंकर निषाद ने किया। इस मौके पर तेज प्रताप मौर्य, डॉ. के कुमार, राकेश कुमार मौर्य, श्याम बिहारी यादव, सत्यनारायण पटेल, भागीरथी मौर्य, रघुवर मौर्य, अनिरूद्घ मौर्य, सुुजीत कुमार, श्रीनाथ धांगर, मंजूलता आदि रही।