छत्तीसगढ़, आसाम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम की तर्ज पर प्रदेश के भी दुर्गम इलाकों में स्थित गांव लोकल ग्रिड से रौशन होते नजर आएंगे। फिलहाल सूबे में सोनभद्र, लखीमपुर खीरी और महाराजगंज का इसके लिए चयन किया गया है। केंद्र सरकार से जुड़े ग्रामीण विद्युतीकरण कारपोरेशन (आरईसी) ने इन जिलों में चिह्नित गांवों और मजरों की सूची भी करीब-करीब फाइनल कर ली है। चंद दिन बाद शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में इस पर कार्य भी शुरू होने की उम्मीद है।
ज्यादातर पहाड़ी और पठारी भूभाग वाले सोनभद्र में अभी भी कई गांव, मजरे ऐसे हैं, जहां बिजली पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। दूर-दूर बिखरी आबादी के लिए भी बिजली उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार की इस योजना में ऐसे गांवों, बस्तियों का भी चयन किया गया है, जहां आठ से दस घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है। या फिर उस गांव को रौशन करने में काफी अधिक व्यय आ रहा है।
सूत्रों की मानें तो इस योजना के लिए बस्ती और शाहजहांपुर जिले का भी नाम प्रस्तावित है लेकिन तकनीकी कारणों से यहां अभी लोकल ग्रिड को लेकर आरईसी की ओर से सर्वे प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकी है। उधर, भाजपा ऊर्जा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक इं. ओमप्रकाश पांडेय कहते हैं कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश को लेकर गंभीर है। इसलिए आरईसी के जरिए यहां बिजली से वंचित गांवों को रौशन करने की योजना बनाई गई है।