वन विभाग की ओर से प्रत्येक तीन वर्ष पर वन्य जीवों की गणना कराई जाती है। गत वर्ष अप्रैल-मई में गणना के दौरान वन विभाग की टीम को कैैमूर के जंगलों में कहीं भी तेंदुए की मौजूदगी के निशान नहीं मिले थे। इसी आधार पर विभाग ने कैैमूर के जंगलों में तेंदुआ न होने का दावा किया था। इसके कुछ माह बाद ही तेंदुए की मौत ने सबको सकते में डाल दिया है। कुछ दिन पहले भी म्योरपुर में एक तेंदुए को जाल में फंसाकर शिकारियों ने मार डाला था। तब भी वन विभाग ने जिले में तेंदुआ न होने की बात कही थी।
कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य में तेंदुए की मौत के लिए पीयूसीएल के प्रदेश सचिव विकास शाक्य एडवोकेट ने अवैध खनन को कारण बताया है। कहा कि अवैध खनन और सेंचुरी के बेहद करीब बफर जोन में भारी ट्रकों की आवाजाही से लगातार वन्य जीव प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से सोनभद्र में सेंचुरी एरिया के एक किमी दायरे को बफर जोर घोषित कर कई दिशा-निर्देश व मानक जारी किया है। सोन नदी में शिल्पी से गुरदह 20 किलोमीटर व पटवध से कन्हौरा 14 किलोमीटर कैमूर वन्य जीव विहार में है।
बीच के 11 किलोमीटर नदी क्षेत्र में कई बालू खनन पट्टे स्वीकृत कर दिए गए हैं। मानक को ध्यान में रखा जाता तो सोन नदी में पानी पीने और जलक्रीड़ा के लिए जाने वाले वन्य जीव नदी में ट्रकों की लंबी कतारों व ध्वनि प्रदूषण से आहत होकर के बेसुध सड़कों पर नहीं भागते। उन्होंने मामले की जांच कराकर पूर्व घोषित मानकों का पालन कराने की मांग की है।