दूूसरों की नजर उतारने को कौन कहे अब नींबू और मिर्च को ही महंगाई की नजर लग गई है। महंगाई के कारण लोगों की थाली से नींबू दूर होता जा रहा है। बाजार में नींबू की बढ़ती मांग और इस बार पैदावार कम होने के कारण इसके दाम सातवें आसमान पर है। व्यापारी वर्ग इसे पैदावार और आवक में कमी से जोड़ कर देख रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि इस बार फूल आने के मौसम में ही बारिश हो गई। इससे फूलों में फल बहुत ही कम लगे। वहीं कई किसानों के पेड़ में फल लगने के बाद भी वो नीचे गिर गया। ऐसे में नींबू की पैदावार प्रभावित हुई। वहीं कई व्यापारियों का यह मानना है कि बढ़ती तपिश और रमजान का महीना होने से इसकी मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। यहां नींबू की पैदावार बड़े स्तर पर नहीं होती है। ऐसे में यहां के लोग अन्य मंडियों और क्षेत्रों से आने वाले नींबू पर ही आश्रित हैं। इस समय मंडी में नींबू की आवक काफी कम हो गई है। ऐसे में आम आदमी की पहुंच से नींबू गायब हो गया है। पिछले दिनों दो से ढाई रुपये पीस की दर से बिकने वाला नींबू इन दिनों आठ से दस रुपये पीस तक बिक रहा है।
मिर्च भी हुई तीखी
जिले में नींबू के बाद अब मिर्च ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। पूर्व में दस से पंद्रह रुपये प्रति किलो की दर से बिकने वाली मिर्च भी अब तिखी हो रही है। बाजार में अब मिर्च क्वालिटी के आधार पर 20 रुपये प्रति किलो से लेकर 60 रूपये किलो की दर से बिक रही है। ऐसे में यह भी लोगों के लिए महंगा साबित हो रही है। ऐसे में गृहणियों की रसोई से नींबू और मिर्च गायब होता दिख रहा है।
व्यापारियों ने कहा आवक कम होने से बढ़े दाम
त्योहारी सीजन में भी लोगों को बमुश्किल से नींबू मिल रहा है। व्यापारी वर्ग इसके लिए ट्रांसपोर्ट किराए में वृद्धि, पैदावार कम होने और आवक कम होने को जिम्मेदार मान रहे हैं। सब्जी व्यवसायी शिवांक सोनकर बताते हैं कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से माल भाड़ा बढ़ा है। इससे दाम बढ़े हैं। वहीं जियालाल सोनकर ने नींबू की आवक कम होने को दाम में वृद्धि का कारण बताया है। शिव का कहना है कि इस बार बारिश के कारण भी नींबू की पैदावर प्रभावित हुई, जिसका असर इसके दाम पर दिख रहा है।