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Sonebhadra News: चोपन-चुनार रेलमार्ग के दोहरीकरण के लिए जिले के 29 गांवों में अधिग्रहित होगी भूमि

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चोपन-चुनार रेलमार्ग के दोहरीकरण की कवायद तेज हो गई है। नए रेल मार्ग के लिए सोनभद्र की तीन तहसीलों के 29 गांवों की करीब 31 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इसमें 24 गांव रॉबर्ट्सगंज तहसील के हैं, जबकि घोरावल के तीन और ओबरा तहसील क्षेत्र के दो गांव शामिल हैं।
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रेलवे की ओर से सर्वे के बाद भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी मिर्जापुर (सिंचाई) के माध्यम से अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी की जाएगी।उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के अंतर्गत चोपन से चुनार के बीच 102 किमी लंबे रेलमार्ग के दोहरीकरण की मांग काफी पुरानी है।
अगस्त 2022 में रेलवे ने इसे मंजूरी देते हुए 1424 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। इसमें करीब 230.30 करोड़ की लागत से सोन नदी पर 1128 मीटर लंबे पुल का निर्माण भी शामिल है। करीब 25 लाख की आबादी को सीधा लाभ पहुंचाने वाली इस परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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कार्यदायी संस्था ने कार्य तेज कर दिया है। चोपन से चुनार स्टेशन के बीच नई रेल लाइन बिछाने के लिए जिले के अंदर 31.425 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी। यह भूमि अलग-अलग गांवों में हैं। सर्वे में इसे चिह्नित कर लिया गया है और नक्शा सहित अन्य विवरण भी तैयार कर लिया गया है।
इसके दायरे में आने वाले सबसे ज्यादा 24 गांव रॉबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र में हैं, जबकि तीन गांव घोरावल तहसील क्षेत्र का हिस्सा हैं। ओबरा तहसील का एक गांव भी इसके शामिल है।

इन गांवों से भूमि अधिग्रहण का है प्रस्ताव
रेलमार्ग के दोहरीकरण के लिए कराए गए सर्वे के तहत जिले के 29 गांवों से कुल 31.325 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव है। इसमें रॉबर्ट्सगंज तहसील का दुलुरु, बगही, बसवा निस्फ, भरकवाह, सलखन, घुवास कलां, घुवास खुर्द, जोकाही, कूरा, मुड़िलाडीह, महुलिया, पलिया खुर्द, पकरी, पांपी, सहिजन कला, सिरखोरा, शिवखरी, हिंदुआरी, पिथा, कठपुरवा, केकराही, खैराही, अराेली, अवई और घोरावल तहसील के करमा, टिकुरिया, मदैनिया, ओबरा तहसील के अवई और पटवध गांव शामिल हैं।


माल ढुलाई के लिए अहम है यह रेल मार्ग
चोपन-चुनार रेलमार्ग यात्री सेवाओं के साथ माल ढुलाई के लिए भी बेहद अहम है। इस पर वर्तमान में प्रति दिन 20 से 22 मालगाड़ियों और 14 कोचिंग ट्रेनों का संचालन होता है। चुनार-चोपन खंड पर यातायात काफी बढ़ गया है। विद्युतीकरण के बाद यह और तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ते यातायात को पूरा करने और हाई डेंसिटी नेटवर्क मार्ग पर भीड़भाड़ कम करने के लिए चुनार-चोपन के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई थी। रेलमार्ग के दोहरीकरण से एनसीएल की खदानों से उत्तर भारत के पावर प्लांट तक कोयला ढुलाई में सहूलियत मिलेगी। वाराणसी और प्रयागराज क्षेत्र को झारखंड एवं छत्तीसगढ़ की सरल और सीधी कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

चुनार-चोपन दोहरीकरण रेल परियोजना के लिए सोनभद्र में आने वाली भूमि का नक्शा व अन्य विवरण तैयार कर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी मिर्जापुर (सिंचाई) के कार्यालय में उपलब्ध कराया गया है। वहां से इसका अवलोकन कर कोई दावा, आपत्ति दायर कर सकता है। सुनवाई के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। -विपिन कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी निर्माण, उत्तर मध्य रेलवे।
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