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Sonebhadra News: पर्यटन विकास में कहीं जमीन के विवाद तो कहीं नियम बने रोड़ा

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सोनभद्र। सरकार सोनभद्र को स्विट्जरलैंड बनाना चाहती है। इसके लिए पर्यटन विकास पर खूब जोर है। नए जगह चिह्नित हो रहे हैं। उनके लिए योजनाएं बन रही हैं। धन भी मिल रहा है, लेकिन कहीं जमीन का रोड़ा तो कहीं अन्य दिक्कतों से काम पूरा नहीं हो पा रहा है। हाल यह है कि सलखन के फॉसिल्स पार्क में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए मिले पैसे लौटाने पड़े। ढढौरा जलप्रपात को विकसित करने के लिए मिली राशि भी वापस हो गई। खंता पिकनिक स्पॉट का काम जमीन के विवाद में बंद है तो मुक्खा फाल तक पहुंचने वाला रास्ता नहीं बन पाया है। धंधरौल बांध के विकास की योजना एनओसी के इंतजार में अटकी है।
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सोनभद्र का पर्यटन विकास सरकार की प्राथमिकता में है, बावजूद इसके धरातल पर कुछ खास उपलब्धि हासिल नहीं हो पाई है। पर्यटन स्थलों के लिए योजनाएं तो खूब बन रहीं, मगर पूरी नहीं हो पा रही हैं। इसके पीछे विभागाें में समन्वय का अभाव, वन विभाग के कड़े नियम तो अन्य कारण भी हैं। दुनिया के सबसे पुराने सलखन फाॅसिल्स पार्क में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए पिछले साल 2 करोड़ से अधिक की धनराशि वन विभाग को दी गई थी। नेचर ट्रेल, प्रकृति चित्रण केंद्र, गजीबाे आदि कार्य होने थे। संरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण वन विभाग को ही काम कराने के लिए कहा गया था। वन विभाग ने योजना भी बनाई, मगर पूरे साल में महज 12 लाख रुपये से ही काम हो सका। वन नियमों का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए गए। अब इसकी क्लोजर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसी वन क्षेत्र में नए पिकनिक स्थल के रूप में घोरावल के ढढौरा जलप्रपात को विकसित किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के गजीबो, किड्स पार्क, पेयजल, शौचालय सहित अन्य सुविधाओं के लिए दो कराेड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। यह पैसा भी वापस हो गया। इसके पीछे भी वन नियमों की दलील दी गई। मुक्खा फाल में दो साल से जिला प्रशासन सड़क बनाने का प्रयास कर रहा है। डीएमएफ से धनराशि भी स्वीकृत हुई, लेकिन काम नहीं हो पाया। फाल तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क है, जिस पर बारिश के बाद चलना दूभर रहता है। धंधरौल बांध के पास पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के लिए वन, पर्यटन और आयुष विभाग ने मिलकर योजना बनाई थी। पिछले डेढ़ साल से प्रस्ताव शासन में अटका है। बांध की सुरक्षा का हवाला देते हुए सिंचाई विभाग के स्तर से एनओसी लंबित है।
खंता में जमीन विवाद से अटक गया काम
रिहंद जलाशय के पीछे म्योरपुर के खंता को पिकनिक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया था। एनटीपीसी रिहंद ने इसे विकसित करने के लिए जिला प्रशासन से करार किया। सीएसआर के माध्यम से चार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। एक करोड़ जारी भी हो गए, जिससे काम शुरू हुआ, लेकिन जमीन के विवाद में मामला अटक गया। एक साल से यह काम बंद है। मिनी गोवा के रूप में मशहूर अबाड़ी में पर्यटकों के लिए शेड, कैफेटेरिया, पेयजल, शौचालय आदि के लिए वर्ष 2024 में 433.94 लाख का प्रस्ताव बना था। इसे भी मंजूरी नहीं मिल पाई। आसपास वन भूमि इसकी वजह रही।
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डोंगिया जलाशय को विकसित करने की योजना साकार नहीं
पिपरी में रिहंद जलाशय के पास डोंगिया जलाशय को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में तत्कालीन डीएम चंद्रविजय सिंह ने रुचि दिखाई थी। इसके लिए साडा से प्रस्ताव भी तैयार कराया गया। बोटिंग के लिए नगर पंचायत की ओर से नाव भी मंगाई गई थी। घाट आदि के कार्य होने थे। यह भी तीन विभागाें के विवाद में उलझ गया।
सलखन और ढढौंरा में कार्य वन विभाग को कराना था। उन्हीं ने योजना बनाई थी, जिसके आधार पर धनराशि आवंटित हुई थी। बाद में नियमों के चलते काम नहीं हो पाया। खंता में जमीन विवाद के कारण काम रुका हुआ है। धंधरौल में एनओसी की प्रक्रिया शासन स्तर से होनी है। पर्यटन विकास को लेकर बेहतर काम हो रहे हैं। अवरोधों को दूर कराते हुए योजना बनाई जा रही है। जल्द ही अच्छे परिणाम दिखेंगे। -बृजेश कुमार, जिला पर्यटन अधिकारी।
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