एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई टीम ने गुरुवार को जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोपन में पत्रावलियों की जांच की।
जननी सुरक्षा से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों से पूछताछ की। विभिन्न सामानों की खरीद के लिए अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुए ठेकेदारों से भी सवाल पूछे। इसके लिए वाराणसी से भी टेंडर डालने वाले ठेकेदार बुलाए गए थे।
वर्ष 2007-11 के बीच हुए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई के इंस्पेक्टर आलोक शाही पिछले इन दिनों जिले में हैं।
गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के एक निरीक्षक के साथ इंस्पेक्टर जिला अस्पताल में शाम करीब पांच बजे पहुंचे। यहां अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत चश्मों की खरीद के लिए तत्कालीन समय में हुए टेंडर में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
सीबीआई इंस्पेक्टर ने वाराणसी से बुलाए गए एक ठेकेदार और यहां के कई ठेकेदारों से पूछताछ की। इन वर्षों के बीच स्वास्थ्य विभाग में नियुक्त किए गए कर्मचारियों से भी जानकारियां ली गईं।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कक्ष में चल रही पूछताछ के क्रम में आशा कार्यकर्ताओं और जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों को भी तलब किया गया था। इनसे एक फार्म भी भरवाया गया।
सूत्रों की मानें तो जननी सुरक्षा योजना से जुड़ी लाभार्थी अनीता, ममता केशरी, सरिता, मंजू, निर्मला, आशा, मीरा, सत्यवती, सीमा और शशि को परीक्षण के लिए बुलाया गया था,
तो आशा कार्यकर्ता चंद्रावती पाठक, तंत्रलता, रेहाना, गीता यादव, विद्यावती और गीता को पूछताछ के लिए तलब किया गया था।
सीबीआई इंस्पेक्टर ने चोपन प्रतिनिधि के अनुसार एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के इंस्पेक्टर गुरुवार को दोपहर बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।
यहां उन्होंने अधीक्षक और अन्य कर्मचारियों से पूर्व में जननी सुरक्षा योजना, नसबंदी तथा एनआरएचएम से जुड़े सामानों की खरीद के बारे में पूछताछ की। पत्रावलियों को तलब कर उनकी जांच की।
इस दौरान आशा कार्यकर्ताओ को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। उधर, सीबीआई इंस्पेक्टर ने बताया कि उन्होंने किसी आशा कार्यकर्ता और महिला लाभार्थी को नहीं बुलाया है।
उनसे कोई फार्म नहीं भरवाया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने अपने काम से उन्हें बुलाया होगा। जिन्हें जांच के लिए बुलाया गया है, उनसे पूछताछ की जा रही है।