कोन स्थित कनहर नदी पर बने पुल पर पड़ी दरार से दिखती छड़। अमर उजाला
नक्सल प्रभावित दर्जनों गांवों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने और क्षेत्र के बेहतर विकास के लिए करीब पांच साल पूर्व कनहर नदी पर बने पुल में दरार पड़ गई है। बालू लदे ओवरलोड ट्रकों के संचालन से पुल पर पड़ी दरार से छड़ भी दिखने लगी है। हालात यह है कि लोग इस पर चलने में भय महसूस करते हैं। लोगों को आशंका है कि प्रशासन ओवरलोड वाहनों के संचालन के प्रति न चेता तो इस पुल पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
चोपन ब्लाक के पूर्वी भाग को जोड़ने के लिए कनहर नदी पर पुल का निर्माण कराया गया था। इस पुल के निर्माण की स्वीकृति वर्ष 1998 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कोन में एक शादी समारोह में आने पर दी थी और इसके लिए 14 करोड़ रुपये आवंटित किया था। सरकार चले जाने के बाद इस पुल की आधारशिला भी नही रखी जा सकी। फिर वर्ष 2002 में सपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह ने चंदौली से इस पुल का शिलान्यास कर दिया।
लेकिन उनकी भी सरकार चली जाने के बाद पुल बनने का सपना अधूरा रह गया। पुल के निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन के बाद वर्ष 2012 में पुल बनकर तैयार हुआ। गुणवत्ता की कमी ने निर्माण के पांच वर्ष भी पूरे नहीं हुए और पुल पर दरार पड़ गई है। पुल के छड़ दिखने लगे हैं, जो लोगों की चिंता का सबब बने गए हैं। बालू लदे ओवरलोड वाहनों के संचालन से जर्जर हो रहा पुल की भी धराशायी हो सकता है। अवधेश राय, कमलेश कुमार, दिलीप कुमार, ओमप्रकाश, बुद्घि, गुड्डू आदि ने जर्जर हो रहे कनहर पुल से ओवरलोड वाहनों के संचालन पर रोक की मांग की है।